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गेहूं खरीदी में स्लॉट बुकिंग का खेल दलाल वसूल रहे 50 से 100 रुपये क्विंटल

May 21, 2026

  • ठप पड़ी वेबसाइट बनी मुसीबत, रातभर जागकर पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे ग्रामीण
  • पाटन से लेकर पनागर तक के किसानों ने छोड़ा काम, दफ्तरों के काट रहे चक्कर

जबलपुर। जिले में सरकारी गेहूं उपार्जन केंद्रों पर लागू की गई ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है, जिसके कारण 51 हजार पंजीकृत किसानों में से केवल 37 हजार किसानों को ही स्लॉट मिल सका है और करीब 14 हजार किसान अपनी फसल तुलाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सर्वर डाउन रहने और रात के समय पोर्टल खुलने से परेशान किसान पाटन, शाहपुरा, सिहोरा, कुंडम, मझौली और पनागर जैसी तहसीलों से 50-60 किमी दूर जिला खाद्य विभाग कार्यालय और कलेक्ट्रेट आकर स्लॉट बुकिंग के लिए आवेदन दे रहे हैं। अब तक 36946 किसानों से 29500 केंद्र पर 20 लाख क्विंटल गेहूं की खरीदी हो चुकी है, लेकिन शेष बचे अन्नदाताओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


  • सर्वर की तकनीकी खराबी और दूरदराज से पहुंचे किसान
    जिले में सरकारी नियमों के तहत गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग को पूरी तरह अनिवार्य किया गया है, लेकिन मुख्य सर्वर लगातार डाउन रहने से हजारों किसान अपनी बुकिंग नहीं करा पा रहे हैं। कलेक्ट्रेट और खाद्य विभाग कार्यालय पहुंचे पीडि़त किसानों का कहना है कि पोर्टल ज्यादातर केवल रात के समय खुलता है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भारी तकनीकी दिक्कत आती है। इस अव्यवस्था से परेशान होकर पाटन, शाहपुरा, सिहोरा, कुंडम, मझौली और पनागर के किसान अपने खेतों का काम छोड़कर 50-60 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगा रहे हैं, जहां केवल आवेदन जमा किए जा रहे हैं और किसानों को कोई ठोस या पक्का समाधान नहीं मिल पा रहा है।

    स्लॉट की कालाबाजारी और दूसरे खातों पर तुलाई का खेल
    स्लॉट बुकिंग न होने की इस गंभीर स्थिति का अनुचित लाभ कुछ स्थानीय बिचौलिए और व्यापारी उठा रहे हैं। जिन रसूखदारों ने पहले ही अधिक मात्रा का स्लॉट बुक करवा लिया था, वे अब परेशान और जरूरतमंद किसानों से संपर्क कर रहे हैं। ऐसे किसानों से प्रति क्विंटल 50 से 100 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है और दूसरे के खातों पर उनका गेहूं तुलाने का खेल चल रहा है। इस पूरी गड़बड़ी में विभाग के कुछ स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है जो दलालों के नंबर बांट रहे हैं। कई निजी गोदामों में बिना ऑनलाइन बुकिंग के ही माल रखवाया जा रहा है और बाद में कागजी खानापूर्ति करने का आश्वासन दिया जा रहा है।

    मंडी से कम दाम में खरीदे अनाज को सरकारी केंद्रों में खपाने की तैयारी
    कृषि उपज मंडियों में गेहूं के दाम सरकारी उपार्जन केंद्रों की तुलना में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक कम चल रहे हैं। इसी बड़े अंतर के कारण मुनाफा कमाने के लिए व्यापारियों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो गया है जो मंडियों से कम दाम पर पुराना गेहूं खरीदकर उसे सरकारी केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खपा रहा है। इस अवैध काम को सही साबित करने के लिए पुराना गेहूं खरीदने के बाद फर्जी बिल और नकली तौल पर्चियां तैयार की जा रही हैं ताकि परिवहन पर कोई सवाल न उठे। अगर खरीदी केंद्रों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाए तो इस बड़े घोटाले का सच सामने आ सकता है।

    विभिन्न क्षेत्रों में स्लॉट बुकिंग के आंकड़े और किसानों में असंतोष
    जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्लॉट बुकिंग के आंकड़ों को देखें तो अधारताल में 417, कुंडम में 1462, गोरखपुर में 339, जबलपुर में 3302, पनागर में 4754, मझौली में 7726, रांझी में 268, शाहपुरा में 2117 और सिहोरा में 10203 स्लॉट बुक किए गए हैं। इन केंद्रों पर अब तक 36946 किसान अपनी उपज बेच चुके हैं, लेकिन जिन 14 हजार किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो पाए हैं वे पूरी तरह असमंजस में हैं। अपनी फसल न बिकने से नाराज और परेशान किसान अब लामबंद हो रहे हैं और प्रशासन के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

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