
वही हुआ जो होना था… ईरान (Iran) मान चुका था कि घुटने अमेरिका (US) ने टेके हैं… बात करना उसकी मजबूरी है… उसकी तो केवल चर्चा के लिए मंजूरी है… लिहाजा अपनी शर्तों पर अड़े ईरान ने इक्कीस घंटे तक हुज्जत के बाद फटे में पांव डालने वाले पाकिस्तान (Pakistan) की फजीहत कर बिना समझौते वैंस को लौटा दिया… हरल्ला अमेरिका अपनी हार को जीतना चाहता था… तेल तो मिला नहीं, इसलिए होर्मुज हथियाना चाहता था… ईरान को पंगू कर उसका यूरेनियम छीनना चाहता था, ताकि जब उसका मिजाज बदले, उसकी अकड़ भडक़े, उसकी जिद के लिए मचले, तब वो होर्मुज में बैठकर ईरान को तबाह कर सके… अब सिरफिरा अमेरिका और उसकी पतलून पहनकर आए वैंस यह समझ नहीं पाए कि वो डील करने नहीं, अपनी इज्जत बचाने आए हैं… वो इज्जत, जो ट्रम्प के बड़बोलेपन से दांव पर लगी है, जिसके ऊलजुलूल बयानों से दुनिया चिढ़ी है…जिसकी शहंशाही खिसियाहट में बदल चुकी है…जो खुद नहीं जानता वो कह क्या रहा है…क्या कर रहा है और मर कौन रहा है… अपनी डिप्लोमेसी और दोहरी नीति के लिए मशहूर अमेरिका पहले जांचता-परखता है, फिर अंदर घुसता है, लेकिन यहां तो अंदर घुसने के बाद गिरने और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलने पर चूहे की तरह बातचीत का बिल बनाकर बाहर आया अमेरिका यदि फिर घुसने या मारने की धमकी देता तो उसे कोई भी गीदड़ समझ लेगा… यही हुआ ईरान के साथ… अपनी हार को जीत में बदलने का तुगलकी मिजाज लिए आया अमेरिका एक बार फिर हार गया… इस बार हार का प्रहार हथियार से नहीं, जुबान से हुआ… ईरान के हाथों में अपने बच्चों के खून से सने कपड़े और मारे गए मासूमों के चित्र थे… वो दुनिया को अमेरिका की दरिंदगी दिखाकर बातचीत की मेज पर बैठा और न यूरेनियम लौटाने और न होर्मुज सौंपने पर राजी हुआ और राष्ट्रहित की बात कहकर अमेरिका को टका-सा लौटा दिया… अमेरिका को दूसरी मात देने के लिए ईरान ने उसके ही हिमायती पाकिस्तान की जमीन को अपना रास्ता बनाया और शरीफ-मुनीर का चेहरा उतारकर इस्लामिक देशों की मुखियागीरी का भी दांव खेल गया… ईरान ने बता दिया कि पाकिस्तान का परमाणु बम उसके होर्मुज के एक एटम बम के आगे फुस्सी है… अडिय़ल की हार और ईरान की जीत के चलते परेशान दुनिया अब किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठी है, जिसे वो नमस्कार कर सके कि वो आए और होर्मुज खुलवाए… लेकिन ट्रंप ने और खतरनाक दाव खेल दिया… जिस होर्मुज को नहीं खुलवा सके उसे बंद कराने और ईरान को सबक सिखाने के चक्कर में पूरी दुनिया को संकट में डालने की सिरफिरी सोच अंजाम देने के लिए कल से खुद उन जहाजों को रोकेंगे, जो होर्मुज से निकलेंगे… खिसियाने ट्रंप खंभा नोंचते हुए अब पूरी दुनिया के लिए सितमगर बनेंगे… वो ईरान को चोंट पहुंंचाने की कोशिश में कई देशों को घायल करेंगे… पूरी दुनिया चाहती है कि जंग रुके, धरती की जंग का हिस्सा समंदर न बने… लेकिन ट्रम्प तो ट्रम्प हैं… खिसयाए, सठियाए, कब्र में पैर लटकाए ट्रंप पूरी दुनिया की शांति को जहन्नुम बनाने पर तुले हैं….
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