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बिना फायर सेफ्टी के बारात घर आग लगी तो किसकी होगी जिम्मेदारी

April 21, 2026

  • सड़कों पर होने वाले विवाह आयोजनों से बिगड़े हालात, पब्लिक जाम की गिरफ्त में

जबलपुर। शहर में वैवाहिक सीजन की शुरुआत होते ही आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहर के विभिन्न रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित बारात घरों ने नगर निगम के नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। इन आयोजनों के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान निकलने वाली बारातें मुख्य सड़कों पर ही सज रही हैं और बारातियों के नाचने-गाने के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि शहर के प्रमुख मार्गों पर बारात के कारण हर 30 मिनट में जाम लग रहा है। जब तक बारात आगे नहीं बढ़ जाती तब तक पीछे खड़े वाहन चालक फंसे रहते हैं। प्रशासन द्वारा इन बारात घरों पर नियंत्रण न होने के कारण आम आदमी का सड़क पर चलना दूभर हो गया है। नियम और शर्तों की धज्जियां उड़ाने वाले इन बारातघरों में यदि कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी।

सड़कों पर सज रहे स्वागत द्वार
बारातों ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। बाराती सड़क के बीचों-बीच नाचते हुए चलते हैं जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। सड़कों पर ही स्वागत द्वार और स्टैंड बना दिए गए हैं जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। दफ्तर जाने वाले लोगों और एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को भी इन बारातों के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार बारात को सड़क बाधित करने की अनुमति नहीं है लेकिन धरातल पर इसका पालन कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है। आयोजक और बारात घर संचालक सार्वजनिक संपत्ति का निजी हित में उपयोग कर रहे हैं।

नियमों के विरुद्ध मिली अनुमतियां
नगर निगम के अधिकारियों ने शहर की ऐसी संकरी और तंग गलियों में बारात घरों को संचालन की अनुमति दे दी है जहां दो चार पहिया वाहनों का एक साथ निकलना भी संभव नहीं है। इन घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विवाह स्थल होने से स्थानीय निवासियों का अपने घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बिना किसी ठोस भौतिक सत्यापन के इन केंद्रों को लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। नियमों के मुताबिक व्यावसायिक भवनों के लिए सड़क की एक निश्चित चौड़ाई अनिवार्य होती है लेकिन जबलपुर के अधिकांश क्षेत्रों में इस मापदंड की सरेआम अनदेखी की गई है।

पार्किंग की जगह अवैध स्टैंड
शहर के अधिकांश बारात घरों के पास स्वयं की कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं है। वैवाहिक कार्यक्रमों में शामिल होने वाले मेहमान अपने वाहन सड़कों के किनारों पर ही पार्क कर देते हैं। पार्किंग स्थल न होने के कारण सड़कों को ही स्टैंड में तब्दील कर दिया गया है। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है बल्कि आए दिन विवाद की स्थितियां भी निर्मित होती हैं। संचालक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मेहमानों को सड़कों पर वाहन खड़े करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। नगर निगम प्रशासन ने कभी भी इन संस्थानों की पार्किंग क्षमता की जांच करने की जहमत नहीं उठाई है।

फायर सेफ्टी न होना बड़ा जोखिम
सुरक्षा के लिहाज से ये बारात घर किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। अधिकांश भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम यानी आग बुझाने के यंत्रों का पूरी तरह अभाव है। संकरी गलियों में स्थित इन भवनों में आपातकालीन निकास द्वार भी नहीं बनाए गए हैं। यदि किसी कार्यक्रम के दौरान आगजनी जैसा हादसा होता है तो वहां से लोगों का सुरक्षित निकलना लगभग असंभव होगा। बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है और लोगों के जीवन को खतरे में डालकर मुनाफा कमाया जा रहा है। नगर निगम और जिला प्रशासन की निष्क्रियता के कारण बारात घर संचालक बेखौफ होकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। अधिकारियों ने कार्यालयों में बैठकर अनुमतियां तो बांट दी हैं लेकिन मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा नहीं लिया जा रहा है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत सभी विवाह स्थलों का सुरक्षा ऑडिट करना चाहिए ।

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