
डेस्क: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए दो वाणिज्यिक जहाजों पर गोलियां बरसाईं और उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है. इस भारी गोलीबारी और जहाजों के अपहरण की खबर आते ही वैश्विक कमोडिटी बाजार में खलबली मच गई. नतीजतन, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल (Crude Oil) एक झटके में 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर को पार कर गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद यह पहला ऐसा खौफनाक वाकया है जहां ईरानी बलों ने सीधे तौर पर कारोबारी जहाजों को रोकने के लिए भारी हथियारों का इस्तेमाल किया है. ईरानी सेना ने कुल तीन जहाजों को अपने रडार पर लिया था. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ के हवाले से बताया गया है कि IRGC ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और व्यवस्था में किसी भी बाहरी दखल को अपनी ‘रेड लाइन’ घोषित कर दिया है.
हमले का शिकार हुए जहाजों में पनामा के झंडे वाला ‘MSC Francesca’ शामिल है, जिसे ईरानी सेना ने जब्त कर लिया है. हालांकि, मोंटेनेग्रो सरकार ने राहत की सांस लेते हुए स्पष्ट किया है कि इस जहाज पर मौजूद उनके चार क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित हैं. वहीं, लाइबेरिया के झंडे वाले एक ग्रीक जहाज ‘Epaminondas’ पर रॉकेट दागे गए और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं. इस हमले में जहाज के कंट्रोल रूम को काफी भारी नुकसान पहुंचा है और फिलहाल यह भी ईरान के ही कब्जे में है. इसके अलावा तीसरे जहाज ‘Euphoria’ पर भी फायरिंग की गई, लेकिन वह गनीमत से बचकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सीमा में सुरक्षित दाखिल होने में कामयाब रहा.
ट्रंप की ‘आर्थिक घेराबंदी’ पर ईरान का पलटवार
इस पूरे समुद्री बवाल को भू-राजनीतिक नजरिए से समझना भी बेहद जरूरी है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि ईरान को सैन्य बमबारी से कहीं ज्यादा खौफ ‘आर्थिक घेराबंदी’ से लगता है. कूटनीतिक विश्लेषकों की मानें तो होर्मुज की खाड़ी में ईरान का यह उग्र कदम अमेरिका की उसी रणनीति का सीधा और आक्रामक जवाब है. ईरान ने दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि अगर उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो वह भी दुनिया भर की ‘एनर्जी सप्लाई चेन’ को ठप कर देगा.
वर्तमान में एक ओर अमेरिका ने ईरान को हर तरफ से घेरने की कूटनीति अपना रखी है, तो दूसरी तरफ शांति या बातचीत के सभी रास्ते बंद नजर आ रहे हैं. जानकारों का मानना है कि जब तक इस पूरे इलाके में युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक वैश्विक व्यापार के अहम समुद्री रास्तों पर यह खतरनाक ‘लुका-छिपी’ और हिंसा जारी रहने की पूरी आशंका है. आम आदमी और बाजार के लिए इसका मतलब यही है कि जब तक समंदर में शांति नहीं होगी, तब तक कच्चे तेल की आग से महंगाई के झटके लगने का खतरा लगातार बना रहेगा.
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