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साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को रात में लगेगा जानिए समय असर और खास मान्यताएं

April 28, 2026

नई दिल्ली । साल 2026 (Year 2026) में लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण (The Second Solar Eclipse) 12 अगस्त को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना(Significant Astronomical Event) के रूप में सामने आ रहा है जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता (Considerable curiosity) देखी जा रही है यह ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse)होगा और वैज्ञानिक के साथ साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे खास माना जा रहा है हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस ग्रहण को अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे क्योंकि जिस समय यह ग्रहण लगेगा उस समय भारत में रात होगी

ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक चलेगा इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा जिससे कुछ क्षेत्रों में दिन के समय भी अंधकार जैसा वातावरण बन जाएगा यह नजारा मुख्य रूप से आर्कटिक क्षेत्र ग्रीनलैंड और आइसलैंड में साफ तौर पर देखा जा सकेगा इसके अलावा उत्तरी स्पेन और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव दिखाई देगा जबकि फ्रांस ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा

भारत में इस ग्रहण के दिखाई न देने के कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस ग्रहण का दृश्य प्रभाव किसी स्थान पर नहीं होता वहां सूतक काल लागू नहीं माना जाता इसलिए भारत के लोगों को इस दौरान किसी विशेष नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी हालांकि परंपराओं और मान्यताओं के चलते कुछ लोग फिर भी सावधानी बरतना पसंद करते हैं

भारतीय संस्कृति में ग्रहण को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं जिनका पालन आज भी किया जाता है मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए लोग इस समय भोजन से दूरी बनाते हैं और पूजा पाठ या ध्यान में समय बिताते हैं खासकर गर्भवती महिलाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है उन्हें घर के अंदर रहने और किसी भी नुकीली वस्तु के उपयोग से बचने को कहा जाता है

ग्रहण का समय आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है कई लोग इसे मंत्र जाप और ध्यान साधना के लिए शुभ मानते हैं ऐसा विश्वास है कि इस दौरान किया गया जाप और साधना अधिक फलदायी होता है ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की भी परंपरा है जिसे शुद्धि और पुण्य प्राप्ति से जोड़ा जाता है


  • हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है जो सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी की विशेष स्थिति के कारण घटित होती है फिर भी इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ा हुआ है यही कारण है कि हर ग्रहण को लेकर लोगों में जिज्ञासा और आस्था दोनों बनी रहती हैं

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