
नई दिल्ली: ईरान (Iran) से तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बड़ा फैसला लिया है. यूएई ने पेट्रोलियम देशों के ग्रुप्स OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है, जब खाड़ी परिषद (GCC) से उसका तनाव चल रहा है. UAE के इस कदम सेग्रुप्स के असल लीडर, सऊदी अरब को बड़ा झटका लग सकता है. OPEC के पुराने सदस्य UAE के जाने से गड़बड़ी हो सकती है और यह ग्रुप कमज़ोर हो सकता है, जो आमतौर पर जियोपॉलिटिक्स से लेकर प्रोडक्शन कोटा तक कई मुद्दों पर अंदरूनी मतभेदों के बावजूद एकजुटता दिखाने की कोशिश करता रहा है.
OPEC देश पहले से ही ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से होर्मुज़ स्ट्रेट के जरिए एक्सपोर्ट भेजने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं. होर्मुज ईरान और ओमान के बीच एक पतला रास्ता है, जिससे दुनिया का पांचवां कच्चा तेल और लिक्विफाइड नैचुरल गैस का कारोबार होता है. पहले से होर्मुज बंदी झेल रहे OPEC को UAE के इस कदम से बड़ा झटका लगने की उम्मीद है.
UAE के सरकार ने क्या कहा?
यूएई के ऊर्जा मंत्री ने OPEC और OPEC+ प्लस से अलग होने के फैसले पर कहा, यह निर्णय स्वतंत्र रूप से लिया गया था और सऊदी अरब सहित किसी अन्य देश के साथ कोई प्रत्यक्ष परामर्श नहीं किया गया है. हम अपना फैसला खुद लेने में सक्षम हैं. यूएई सरकार का कहना है कि यह निर्णय यूएई की उत्पादन नीति और उसकी वर्तमान और भविष्य की क्षमता की व्यापक समीक्षा के बाद लिया गया है और यह हमारे राष्ट्रीय हित और बाजार की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने में प्रभावी ढंग से योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता पर आधारित है.
क्या ये ट्रंप के लिए अच्छी खबर?
OPEC से UAE का बाहर निकलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी जीत है, जिन्होंने इस ऑर्गनाइज़ेशन पर तेल की कीमतें बढ़ाकर ‘बाकी दुनिया को लूटने’ का आरोप लगाया है. ट्रंप पहले से ही इस ग्रुप को कमजोर करना चाहते हैं, बता दें, इस ग्रुप में रूस और सऊदी अरब का वर्चस्व है.
ओपेक और ओपेक प्लस क्या है?
तेल उत्पादन और बिक्री को लेकर नीति तैयार करने के लिए साल 1960 में इसकी स्थापना की गई थी. शुरुआत में इस संस्था के अंदर इराक, ईरान, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला शामिल था. बाद में इसकी संख्या बढ़ा दी गई. वर्तमान में इस संगठन के अंदर सऊदी अरब, इराक, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), लीबिया, इंडोनेशिया, कुवैत, नाइजीरिया, वेनेजुएला शामिल हैं. ओपेक प्लस देशों में इन 12 सदस्यों के अलावा 10 और देश हैं, जिनमें रूस, अजरबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान और दक्षिण सूडान शामिल हैं.
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