
इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईंधन संकट (Fuel Crisis) गहराने पर पाकिस्तान (Pakistan) ने पहली बार खुले तौर पर भारत (India) की ऊर्जा तैयारी की सराहना की है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक (Petroleum Minister Musadik Malik) ने स्वीकार किया कि देश के पास भारत जैसी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता नहीं है, जिससे बढ़ती वैश्विक कीमतों का असर कम किया जा सके।
मलिक ने बताया कि पाकिस्तान के पास सीमित कच्चा तेल भंडार है, जो केवल कुछ दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। इसके मुकाबले भारत के पास करीब 60-70 दिनों का संयुक्त रणनीतिक और व्यावसायिक तेल भंडार मौजूद है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी प्रभावित होने से पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ गया है।
राहत के लिए करनी पड़ी गोपनीय बातचीत
मंत्री के मुताबिक, उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत देने के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जैसे संस्थानों के साथ गोपनीय बातचीत करनी पड़ी। बजट समझौतों के तहत सरकार को राजकोषीय घाटा पूरा करने के लिए ईंधन पर भारी कर लगाना पड़ा। डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण अतिरिक्त बोझ पेट्रोल पर डालना पड़ा, जबकि दोपहिया चालकों को सब्सिडी भी देनी पड़ी।
ऊर्जा संकट से बढ़ी अशांति
देश में ऊर्जा संकट के चलते व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा पेट्रोल की कीमत में 80 पाकिस्तानी रुपये की कमी के बाद इसे 378 रुपये प्रति लीटर किया गया, लेकिन इससे पहले कीमतों में 42% से अधिक की वृद्धि ने आम लोगों पर भारी असर डाला। इसके चलते विरोध प्रदर्शन और ईंधन की कमी जैसी स्थिति बनी हुई है।
भारत से तुलना में कमजोर स्थिति
मुसादिक मलिक ने कहा कि भारत इस मामले में काफी आगे है। उसके पास पर्याप्त तेल भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है। वहीं पाकिस्तान के पास एक दिन के लिए भी पर्याप्त पेट्रोल भंडार नहीं है, जिससे उसकी ऊर्जा सुरक्षा कमजोर पड़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति और बेहतर रणनीतिक योजना उसे ऐसे संकट से निपटने में सक्षम बनाती है।
आईएमएफ पर निर्भरता बनी चुनौती
मंत्री ने यह भी माना कि पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबरने के लिए आईएमएफ पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि भारत इस तरह के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। भारत के पास पर्याप्त वित्तीय स्वतंत्रता है, जिससे वह तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान करों में कमी कर सकता है।
एक टीवी इंटरव्यू में मलिक ने बताया कि पाकिस्तान के पास केवल वाणिज्यिक तेल भंडार हैं, जो 5-7 दिनों तक ही चल सकते हैं। वहीं रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक भी करीब 20-21 दिनों के लिए पर्याप्त है। ऐसे में अगर हालात और बिगड़े, तो देश के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है।
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