कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मतदान के बाद ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम (EVM strong room) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं की शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बीजेपी नेताओं ने Bidhannagar के एसडीओ को दिए शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि निर्धारित समय से पहले ही स्ट्रॉन्ग रूम खोला जा चुका था। जब वे तय समय पर मौके पर पहुंचे, तो पाया कि कमरे को पहले ही खोला जा चुका था।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि संबंधित स्ट्रॉन्ग रूम को एक-दो नहीं, बल्कि करीब 10 बार पहले ही खोला जा चुका था। नेताओं ने सवाल उठाया कि इसकी अनुमति किसने दी और इसकी जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
प्रशासन की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना अनुमति स्ट्रॉन्ग रूम खोले जाने के आरोप में 6 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रशासन ने आगे की जांच शुरू कर दी है।
TMC ने उठाए पारदर्शिता के सवाल
इसी बीच All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने भी स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पार्टी ने 24×7 CCTV निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है, जहां सीलबंद ईवीएम रखी गई हैं।
टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी Manoj Kumar Agarwal से मुलाकात कर इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा।
कई केंद्रों पर हंगामा
कोलकाता के दो मतगणना केंद्रों पर गुरुवार शाम उस समय तनाव बढ़ गया, जब टीएमसी नेताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं Shashi Panja और Firhad Hakim ने दावा किया कि कई इलाकों—जैसे हरिपाल, जलपाईगुड़ी, सागरदिघी, रामपुरहाट और तामलुक—में CCTV कैमरों के खराब होने की शिकायतें मिली हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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