
नई दिल्ली। सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) जो महिलाओं (Women) में होने वाले सबसे घातक कैंसरों में से एक है, आज भी भारत समेत कई देशों में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। जागरूकता (Awareness) की कमी और समय पर जांच न होने के कारण हर साल लाखों महिलाएं इसकी चपेट में आ जाती हैं। उत्तर प्रदेश की सुनीता जैसी कई कहानियां इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाती हैं, जहां देर से पता चलने पर जीवन बचाना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, चिकित्सा विज्ञान में यह राहत की बात है कि सर्वाइकल कैंसर उन कुछ बीमारियों में से एक है जिसे पूरी तरह रोका जा सकता है। इसी दिशा में ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया के सामने एक ऐतिहासिक उदाहरण पेश किया है।
ऑस्ट्रेलिया की बड़ी उपलब्धि की ओर कदम
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बनने की ओर बढ़ रहा है जो अपने यहां सर्वाइकल कैंसर को लगभग समाप्त कर सकता है। इसका आधार ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण और मजबूत स्क्रीनिंग कार्यक्रम हैं।
यह कहानी 2006 में शुरू हुई, जब वैज्ञानिकों ने HPV संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन ‘गार्डासिल’ विकसित की। इसके बाद 2007 में ऑस्ट्रेलिया ने स्कूलों में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें 12–13 साल के बच्चों को मुफ्त वैक्सीन दी जाने लगी। बाद में लड़कों को भी इसमें शामिल किया गया, ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके।
जांच में बदलाव बना गेम-चेंजर
2017 में ऑस्ट्रेलिया ने पैप स्मीयर टेस्ट की जगह HPV आधारित स्क्रीनिंग शुरू की, जो ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। इसे हर पांच साल में एक बार करना पर्याप्त होता है। साथ ही महिलाओं को खुद सैंपल लेने की सुविधा भी दी गई, जिससे जांच में भागीदारी बढ़ी।
वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, जब किसी देश में प्रति 1 लाख महिलाओं पर 4 से कम मामले रह जाते हैं, तो उसे बीमारी के ‘नियंत्रण’ या लगभग समाप्ति की स्थिति माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है और 2035 से पहले इसे हासिल करने की संभावना जताई जा रही है।
चुनौतियां अभी भी मौजूद
हालांकि, मूल आदिवासी समुदायों में अब भी यह बीमारी अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। वहीं, वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट और महामारी के बाद टीकाकरण दर में गिरावट भी चिंता का विषय बनी हुई है।
वैश्विक स्तर पर प्रयास तेज
स्वीडन, रवांडा और ब्रिटेन जैसे देश भी इस बीमारी को खत्म करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से कई देश अब इसे खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
भारत के लिए क्या सीख?
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में एक प्रमुख कैंसर है, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति सुधारने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सरकार ने 9 से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इसके साथ ही भारत ने अपनी स्वदेशी HPV वैक्सीन सर्वावैक विकसित कर ली है, जिससे टीकाकरण अधिक सुलभ और किफायती हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर टीकाकरण और नियमित जांच को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, तो इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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