तेहरान। पश्चिम एशिया (West asia) के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए माइन ले जाने वाले प्रशिक्षित डॉल्फिन (Dolphin) के इस्तेमाल जैसे असामान्य विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि इस तरह की योजनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे क्षेत्र में पहले से जारी तनाव पर नई बहस छिड़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विचार पूरी तरह नया नहीं है। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ने समुद्री जीवों—खासकर डॉल्फिन—को सैन्य उद्देश्यों के लिए प्रशिक्षित करने के प्रयोग किए थे। दावा है कि ईरान को भी अतीत में सोवियत संघ से प्रशिक्षित डॉल्फिन मिले थे, जिन्हें अब समुद्र में माइन पहुंचाने जैसे मिशनों में उपयोग करने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की चर्चाएं उस समय सामने आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी नौसेना द्वारा क्षेत्र में कड़ी निगरानी और कथित नाकाबंदी के कारण ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा है। ऐसे में ईरान के कुछ धड़े जवाबी कार्रवाई के लिए पारंपरिक से हटकर तरीकों की तलाश में हैं—जिनमें समुद्र के भीतर छिपकर हमला करने वाली रणनीतियां भी शामिल हैं।
हालांकि इस कथित योजना को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रणनीति तकनीकी रूप से जटिल और जोखिम भरी हो सकती है, जबकि नैतिक स्तर पर भी इसका व्यापक विरोध हो सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या असामान्य खतरा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
माना जा रहा है कि यदि ऐसी किसी योजना पर गंभीरता से काम होता है, तो अमेरिका भी इसके जवाब में नई समुद्री सुरक्षा तकनीकों को तेजी से विकसित कर सकता है—जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल यह योजना अधिकतर रिपोर्ट्स और अटकलों तक सीमित है, लेकिन इसने यह जरूर दिखा दिया है कि आधुनिक संघर्षों में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ असामान्य और अप्रत्याशित रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved