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रिसर्च से रियल इम्पैक्ट तक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेश

May 06, 2026

नई दिल्ली: नई दिल्ली के भारत मंडपम में मंगलवार को एक अलग तरह की तस्वीर दिखी. मंच पर सिर्फ भाषण नहीं थे बल्कि लैब, उद्योग और सरकार एक ही सवाल का जवाब खोजते नजर आए कि भारत की अगली बड़ी तकनीकी छलांग कैसी होगी? इसी माहौल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने IIT मद्रास के पहले प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया. केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि रहे. थीम थी भारत के लिए, साथ मिलकर निर्माण.

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा कि अब सिर्फ रिसर्च पेपर, पेटेंट और आंकड़ों का दौर काफी नहीं है. असली कसौटी यह है कि प्रयोगशालाओं में जन्मे विचार कितनी जल्दी अस्पतालों, फैक्ट्रियों, खेतों और आम लोगों की जिंदगी तक पहुंचते हैं. उनका संदेश सीधा था कि भारत को रिसर्च मेट्रिक्स से आगे बढ़कर वास्तविक असर की तरफ जाना होगा.

उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने अनुसंधान, विकास और इनोवेशन के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, लेकिन इसके साथ उन्होंने एक बड़ा संकेत भी दिया. अगर भारत को ग्लोबल इनोवेशन शक्ति बनना है तो सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं चलेगा. उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच 50-50 साझेदारी ही वह रास्ता है जो रिसर्च को बाजार और समाज तक ले जा सकता है.


  • वहीं जयंत चौधरी ने कहा कि भारत का डीप-टेक भविष्य अब केवल कल्पना नहीं रह गया है. रोबोटिक सर्जरी, कार्डियक रिसर्च, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और संप्रभु एआई जैसे क्षेत्रों में हो रहा काम यह दिखाता है कि भारतीय संस्थान अब केवल भागीदारी नहीं कर रहे बल्कि नई दिशा तय कर रहे हैं. उनके मुताबिक ऐसे मंच यह सुनिश्चित करते हैं कि अनुसंधान को उद्देश्य मिले और उद्योग उसे गति दे.

    शिखर सम्मेलन में केवल विचारों की बात नहीं हुई ठोस कदम भी उठे. NTPC Limited, Bharat Petroleum और HSBC के साथ IIT Madras ने नई रणनीतिक साझेदारियों का ऐलान किया. इन साझेदारियों के तहत स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और टिकाऊ भविष्य से जुड़े नए रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे. कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि भारत का डीप-टेक भविष्य अब कल्पना नहीं रहा. रोबोटिक सर्जरी, सेमीकंडक्टर, कार्डियक रिसर्च और संप्रभु एआई जैसे क्षेत्रों में जो काम हो रहा है वह दिखाता है कि भारतीय संस्थान अब सिर्फ भागीदारी नहीं कर रहे बल्कि दिशा तय कर रहे हैं.

    शिखर सम्मेलन की सबसे दिलचस्प झलक प्रदर्शनी में दिखी. यहां IIT मद्रास के 15 उत्कृष्टता केंद्रों ने अपनी तकनीकें पेश कीं. ऐसी तकनीकें जो स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, सतत विकास और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में सीधे सामाजिक चुनौतियों को संबोधित करती हैं. कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं था. यह उस नए भारत की झलक थी जहां विश्वविद्यालय केवल डिग्री नहीं देंगे, उद्योग सिर्फ निवेश नहीं करेगा और सरकार सिर्फ नीति नहीं बनाएगी. तीनों मिलकर तय करेंगे कि 2047 का भारत तकनीक के मोर्चे पर दुनिया के सामने कैसा दिखेगा.

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