
पटना. बिहार (Bihar) की राजनीति (Politics) में 7 मई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। मुख्यमंत्री (CM) सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार (NDA Government) अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है। इस बार का शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार बिहार के किसी कैबिनेट विस्तार कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) खुद शामिल होंगे। इस आयोजन को बीजेपी के बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
गांधी मैदान बनेगा ऐतिहासिक आयोजन का गवाह
सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल का विस्तार 7 मई को दिन के पहले हिस्से में किया जाएगा। इसके लिए पटना के गांधी मैदान में भव्य स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। जिला प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था, मंच निर्माण और वीआईपी मूवमेंट को लेकर युद्धस्तर पर काम कर रहा है। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा एनडीए के तमाम बड़े नेताओं की उपस्थिति भी गांधी मैदान में देखने को मिलेगी।
33 मंत्री पद अभी खाली
बिहार विधानसभा के संख्या बल के अनुसार मुख्यमंत्री सहित कुल 36 विधायक मंत्री बन सकते हैं। फिलहाल बीजेपी से सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जबकि जेडीयू से विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। ऐसे में अब मंत्रिपरिषद में कुल 33 पद खाली हैं, जिन पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
बीजेपी और जेडीयू में बराबर हिस्सेदारी
एनडीए के भीतर तय फॉर्मूले के मुताबिक मुख्यमंत्री समेत बीजेपी और जेडीयू को 16-16 मंत्री पद मिलने की संभावना है। वहीं शेष चार सीटें सहयोगी दलों के खाते में जाएंगी। इनमें चिराग पासवान की पार्टी को दो सीटें मिलने की चर्चा है, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के हिस्से में एक-एक सीट आ सकती है।
परिवार के सदस्यों को मिल सकता है मौका
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा अपने परिवार के सदस्यों को मंत्री बना सकते हैं। माना जा रहा है कि मांझी अपने बेटे को और उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी को मंत्री पद दिला सकते हैं।
सामाजिक समीकरणों पर रहेगा फोकस
सूत्रों के मुताबिक संभावित मंत्रियों की सूची लगभग तैयार है। इसमें अनुभव, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दल ऐसे चेहरों को मौका देने की तैयारी में हैं, जो आगामी चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकें।
शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा आयोजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में एनडीए अपनी ताकत और एकजुटता का बड़ा संदेश देने की तैयारी में है। ऐसे में 7 मई का यह कार्यक्रम बिहार की राजनीति में नई तस्वीर पेश कर सकता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved