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भारत–EU की बड़ी पहल: बैटरी कचरे से निकलेगा ‘खजाना’, 169 करोड़ रुपये का रीसाइक्लिंग मिशन शुरू

May 08, 2026

नई दिल्ली। भारत (India) और यूरोपीय संघ (EU) ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीकों (Battery Recycling Technologies) को बढ़ावा देने के लिए 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) के संयुक्त कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य बैटरी कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी बढ़ाना और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ आधारित सप्लाई चेन को मजबूत करना है।

TTC के तहत शुरू हुई संयुक्त पहल
यह कार्यक्रम भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के तहत शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत भारत और यूरोपीय संघ की कंपनियां, स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्योग (SME), विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान भाग ले सकते हैं। इसमें प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2026 तय की गई है।

होरिजोन यूरोप और भारत सरकार की साझी फंडिंग
इस कार्यक्रम को यूरोपीय संघ के ‘होरिजोन यूरोप’ कार्यक्रम और भारत के भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है।

रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस
इस पहल के तहत आधुनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जिसमें शामिल हैं—

उच्च दक्षता वाली रिकवरी प्रणाली
पुरानी बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को अधिक कुशलता से निकालने वाली तकनीकें विकसित की जाएंगी।


  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
    बैटरी के संग्रह, ट्रैकिंग और छंटाई के लिए डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा ताकि प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सके।

    पायलट प्रोजेक्ट और टेस्टिंग यूनिट
    भारत में एक साझा ‘पायलट लाइन’ विकसित की जाएगी, जहां औद्योगिक स्तर पर रीसाइक्लिंग तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा।

    सेकंड लाइफ बैटरी टेक्नोलॉजी
    पुरानी बैटरियों की सुरक्षा जांच और दोबारा उपयोग (सेकंड लाइफ) के लिए बैटरी डायग्नोस्टिक्स तकनीक विकसित की जाएगी।

    खनिज संसाधनों पर निर्भरता घटाने की रणनीति
    जैसे-जैसे ईवी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों की मांग भी बढ़ रही है। इस साझेदारी का लक्ष्य रीसाइक्लिंग के जरिए इन खनिजों की रिकवरी बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है। अनुमान है कि 2030 तक भारत में लगभग 128 GWh की रीसायकल योग्य बैटरी क्षमता उपलब्ध होगी। इस मॉडल को ‘वर्चुअल माइन’ यानी कचरे से खनिज निकालने की आभासी खदान की अवधारणा के रूप में देखा जा रहा है।

    अधिकारियों की प्रतिक्रिया
    भारत और यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। ईयू के भारत में राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि बैटरियां इतनी अहम हैं कि उन्हें एक बार उपयोग के बाद फेंका नहीं जा सकता। यह पहल खनिज सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद के अनुसार, यह कार्यक्रम देश के बढ़ते ईवी बाजार के लिए मजबूत घरेलू रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करेगा।

    लॉजिस्टिक्स और सर्कुलर इकोनॉमी पर फोकस
    इस पहल में असंगठित क्षेत्र को भी संगठित सिस्टम में जोड़ने वाले लॉजिस्टिक्स मॉडल पर काम किया जाएगा, ताकि पूरी बैटरी सप्लाई चेन अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सके। यह साझेदारी न केवल भारत और यूरोप के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है।

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