नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में तेजी से फैल रही फूड एंड बेवरेज (F&B) इंडस्ट्री में लंबे काम के घंटे और कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसकी वजह बने मशहूर फूड ब्रांड्स (Food Brands) के को-फाउंडर अभिजीत गुप्ता, जिन्होंने एक पॉडकास्ट में माइग्रेंट लेबर और वर्क कल्चर को लेकर बयान दिया।
एक बातचीत के दौरान अभिजीत गुप्ता ने कहा कि कर्नाटक के स्थानीय कर्मचारियों में देर रात तक रेस्टोरेंट में काम करने की इच्छा अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है। उनके मुताबिक, बेंगलुरु जैसे शहरों में कई रेस्टोरेंट रात 1 बजे तक खुले रहते हैं, ऐसे में लंबे समय तक काम करने के लिए ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है जो लेट नाइट शिफ्ट संभाल सकें।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले कर्मचारी देर रात तक काम करने के लिए अधिक तैयार रहते हैं। गुप्ता का कहना था कि दूसरे राज्यों से आने वाले कई कर्मचारी खासतौर पर कमाई के उद्देश्य से बड़े शहरों में आते हैं, इसलिए वे ज्यादा घंटे काम करने को तैयार हो जाते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान सभी स्थानीय कर्मचारियों पर लागू नहीं होता और कई कन्नड़िगा कर्मचारी भी बेहद मेहनती हैं।
पॉडकास्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने गुप्ता की बातों से सहमति जताई और कहा कि माइग्रेंट वर्कर्स परिवार से दूर रहते हैं, इसलिए वे अधिक समय काम में लगाते हैं। वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री की कार्य परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए।
इस विवाद के बाद एक बार फिर देश के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कर्मचारियों की स्थिति, वर्क-लाइफ बैलेंस, कम सैलरी और लंबे काम के घंटों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्री को टिकाऊ बनाने के लिए कंपनियों को बेहतर कार्य वातावरण, कर्मचारियों की सुविधाओं और आधुनिक कार्य प्रणाली पर अधिक ध्यान देना होगा।
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