नई दिल्ली। गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने और पानी की कमी दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर तरबूज का सेवन किया जाता है, लेकिन हाल के दिनों में देश के कई राज्यों से तरबूज (Watermelon) खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने और कुछ मामलों में मौत होने की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद खाद्य सुरक्षा और फूड पॉइजनिंग को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बेलीपार थाना क्षेत्र स्थित मलांव गांव में तरबूज खाने के बाद कई लोग बीमार पड़ गए। बताया गया कि लोगों ने पहले मैगी खाई और बाद में तरबूज का सेवन किया। इसके बाद उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत शुरू हो गई। गंभीर हालत में नौ लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी तरह बिजनौर जिले के शेर नगर नरैनी गांव में 21 वर्षीय युवती की अचानक मौत का मामला सामने आया। परिजनों ने दावा किया कि युवती ने तरबूज खाया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के घुरकोट गांव में भी कटा हुआ तरबूज खाने के बाद चार बच्चे बीमार पड़ गए, जिनमें एक 15 वर्षीय किशोर की इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि मामले में बैक्टीरियल संक्रमण और फूड पॉइजनिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बिहार के बक्सर जिले के सोनबरसा गांव में भी एक ही परिवार के आठ लोगों की तबीयत तरबूज खाने के बाद खराब हो गई। सभी को उल्टी, दस्त और सिरदर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने इसे फूड पॉइजनिंग का मामला बताया है।
वहीं मुंबई के पायधुनी इलाके में कुछ समय पहले एक परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में शुरुआत में तरबूज को वजह माना गया था, लेकिन बाद में खाद्य एवं औषधि विभाग तथा फॉरेंसिक जांच में तरबूज में किसी तरह की मिलावट या जहर नहीं पाया गया। जांच में फूड पॉइजनिंग को मौत का कारण बताया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य रूप से तरबूज खाना सुरक्षित होता है, लेकिन खराब, लंबे समय तक कटा हुआ या संक्रमित तरबूज स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। गैस्ट्रोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार दूषित फल खाने से उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए कटे हुए फलों के सेवन में सावधानी बरतना जरूरी है।
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