
जबलपुर। जबलपुर और आसपास के जिलों में इस बार भीषण गर्मी ने आम जनता के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अंचल में दोतरफा मार पड़ रही है, जहां एक ओर तेज धूप और लू के कारण पशुओं के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आने से देसी घी के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शादी-विवाह के सीजन और युवाओं में सोशल ड्रिंकिंग कल्चर बढऩे से बीयर की मांग में भारी उछाल आया है। मांग बढऩे के बावजूद सोम कंपनी का लाइसेंस निरस्त होने से बाजार में बीयर की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे प्रीमियम ब्रांड दुकानों से गायब हैं। घी कारोबारियों के अनुसार, गर्मी के कारण पशुओं द्वारा कम दूध देने से उत्पादन में 35 से 40 फीसदी तक की गिरावट आई है, जिससे पर्याप्त मात्रा में मक्खन और क्रीम नहीं मिल पा रही है। इस वजह से अमूल, मदर डेयरी, मेघ घी, पारस और नोवा जैसी ब्रांडेड कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, बीयर संकट पर बताया गया कि सोम कंपनी का पूर्व स्टॉक रिलीज कर दिया गया है, जिससे बाजार में डेढ़ माह तक राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि शराब ठेकेदारों कहना है कि लाइसेंस निरस्त होने से सप्लाई चेन कमजोर हुई है। जिससे संकट बढ़ा हुआ है,बीयर ब्लैक में बिक रही है।
घी की कीमतों में उछाल की वजह
जबलपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तापमान बढऩे का सीधा असर पशुधन पर पड़ा है। दुग्ध सप्लाई से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि तेज गर्मी और लू के थपेड़ों के कारण गाय और भैंसों ने दूध देना काफी कम कर दिया है। दुग्ध उत्पादन में अचानक आई 35 से 40 फीसदी की इस कमी की वजह से डेयरी प्लांटों को पर्याप्त मात्रा में क्रीम और मक्खन नहीं मिल पा रहा है। कच्चे माल की भारी किल्लत के चलते घी बनाने की लागत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक महीने के भीतर ही बाजार में देसी घी की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी आई है और फिलहाल आम उपभोक्ताओं को इस महंगाई से राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
किस स्तर तक बढ़ी हैं क़ीमतें
लागत बढऩे के कारण अमूल, मदर डेयरी, मेघ घी, नमस्ते इंडिया, नोवा और पारस जैसी बड़ी ब्रांडेड कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम तुरंत प्रभाव से बढ़ा दिए हैं। बाजार में जो 5 किलोग्राम वाला ब्रांडेड घी का पैक कुछ समय पहले तक करीब 2800 रुपए में आसानी से मिल रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 3100 से 3200 रुपए तक पहुंच गई है। यानी 5 किलो के पैक पर सीधे 400 रुपए तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। मध्यमवर्गीय परिवारों द्वारा सबसे ज्यादा खरीदे जाने वाले 15 किलोग्राम के बड़े पैकिंग वाले घी के डिब्बे, जो अप्रैल के महीने में लगभग 9400 में बिक रहे थे, वे अब बढ़कर 10 हजार के पार पहुंच गए हैं। इस वजह से आम आदमी की रसोई का मासिक बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है।
बीयर लवर्स की हो रही जेब ढीली
जबलपुर संभाग में पड़ रही कड़कड़ाती धूप और शादियों के सीजन के चलते ठंडी बीयर की मांग अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। चालू सीजन में बीयर की बिक्री में लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में किंगफिशर अल्ट्रा, बडवाइजर, हेनेकेन, कोरोना और कार्सबर्ग जैसे प्रीमियम ब्रांड्स की मांग सबसे ज्यादा है, लेकिन मांग के मुकाबले दुकानों में स्टॉक बेहद कम है। इस भारी डिमांड के बीच सोम कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस निरस्त होने के कारण बाजार में बीयर की नई खेप नहीं पहुंच पा रही है, जिससे अधिकांश शराब दुकानों और अहातों से प्रीमियम ब्रांड पूरी तरह से गायब हो चुके हैं।
प्रशासन ने निकाला रास्ता और मालपुर-उत्तर प्रदेश से आ रही सप्लाई
बीयर संकट से निपटने और राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए आबकारी विभाग ने बीच का रास्ता निकाला है। सोम कंपनी के पास जो पहले का तैयार माल गोदामों में डंप पड़ा था, उसे अब बाजार में भेजने के लिए स्टॉक रिलीज कर दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर बीयर प्रेमियों को आने वाले डेढ़ महीने तक थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही जबलपुर अंचल के बाजारों में बीयर और घी की कमी को पूरा करने के लिए मालपुर और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से लगातार गाडिय़ों के जरिए सप्लाई मंगवाई जा रही है, ताकि क्षेत्र में बढ़ती मांग और खपत को संतुलित किया जा सके।
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