
इंदौर। रंगवासा में रिश्तों और सामाजिक दबाव की आड़ में एक 13 वर्षीय पितृहीन नाबालिग बच्ची की जिंदगी से खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। 19 वर्षीय भाई का घर बसाने के लिए 13 साल की मासूम को बलि का बकरा बनाया गया और 42 साल के अंधेड से शादी करा दी गई । देर रात अगवाकर उज्जैन चिंतामन गणेश मंदिर ले जाकर दोनों जोड़ों को ब्याह दिया गया । ससुराल जाने का विरोध करने पर रातभर जहां पिटाई की गई, वहीं अब नई नवेली भाभी की धमकी के बाद उसे ससुराल भेज दिया गया। थाना राऊ पुलिस ने 42 वर्षीय अधेड़ दूल्हे, उसके परिजनों और लडक़ी के दादा-दादी समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंहा ने बताया कि परिवार ने अपने पोते का घर बसाने के लिए नाबालिग पोती का सौदा कर दिया। शर्त यह रखी गई थी कि यदि परिवार की बहू अपने ससुराल लौटेगी तो उसकी ननद यानी 13 वर्षीय लडक़ी का विवाह उसके 42 वर्षीय चाचा से कराया जाएगा। अपने भाई का घर बसाने के लिए नाबालिग विवाह वेदी पर बलि चढ़ा दी गई। विभाग द्वारा समझाइश देने के बावजूद भी उज्जैन ले जाया गया, जहां चिंतामन गणेश मंदिर में विवाह रचाया गया।
विभाग ने पहले ही रुकवा दी थी शादी
जानकारी के मुताबिक 25 अप्रैल को होने वाले बाल विवाह की सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग को मिल गई थी। विभाग की टीम ने दोनों परिवारों को समझाइश देकर विवाह रुकवा दिया था। परिवारों ने भी शादी नहीं करने का भरोसा दिया था। इसके बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर लगातार बच्ची पर नजर रखे हुए थे। प्रशासन को गुमराह करने के लिए पूरा घटनाक्रम चोरी-छिपे किया गया। विवाह के बाद लडक़ी को वापस रंगवासा छोड़ दिया गया, जबकि दोनों दूल्हे अपने-अपने घर लौट गए। हालांकि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं कि आखिर बच्ची को अपने संरक्षण में क्यों नहीं लिया गया, वहीं परिवार की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर नहीं रखी गई।
रात में उज्जैन ले जाकर करवा दी शादी
बालिका ने बयान में बताया कि सांवेर तहसील के ग्राम दयाखेड़ा निवासी ससुराल पक्ष के लोग रात के समय उसे और उसके 19 वर्षीय भाई को इंदौर से उज्जैन ले गए। वहां मंदिर के बाहर दोनों को दूल्हा-दुल्हन के कपड़े पहनाए गए और चिंतामन गणेश मंदिर में माला पहनाकर तथा मांग भरकर विवाह करा दिया गया। विभाग के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर देर रात बच्ची को नींद से उठाकर मारपीट कर अगवाकर उज्जैन ले जाया गया और गुपचुप तरीके से उसकी शादी कर दी गई।
विरोध किया तो दादी ने पीटा
उडऩदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक के मुताबिक बच्ची पर लगातार ससुराल जाने का दबाव बनाया जा रहा था। दादी ने भी उसे मजबूर किया और विरोध करने पर जमकर मारपीट की। बाद में बच्ची की मां ने महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति को लिखित शिकायत दी, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हुआ। जांच में सामने आया है कि नाबालिग की उम्र छिपाने के लिए फर्जी अंकसूची भी तैयार की गई थी। शिक्षा विभाग इस मामले की जांच कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना की धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी।
पिता की मौत के बाद दादा-दादी के पास रह रहे थे बच्चे
पाठक ने बताया कि बच्ची के पिता की मृत्यु हो चुकी है। मां ने दूसरी शादी कर ली थी, जिसके बाद तीनों बच्चे दादा-दादी के पास रह रहे थे। इसी स्थिति का फायदा उठाकर परिवार ने बच्ची पर दबाव बनाया। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने दस्तावेज जुटाकर एडीसीपी महिला अपराध संध्या राय और थाना राऊ पुलिस को सौंपे। इसके बाद पुलिस ने 42 वर्षीय अधेड़, उसके पिता, लडक़ी के दादा-दादी सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब नाबालिग को घर से ले जाने, बाल विवाह कराने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के पहलुओं पर भी अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
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