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ममता बनर्जी को फलता में बड़ा झटका, अभिषेक के प्रभाव वाले क्षेत्र से TMC का दबदबा कमजोर

May 22, 2026

कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) को फलता विधानसभा क्षेत्र (Falta Assembly Constituency) से बड़ा झटका लगने की चर्चा तेज हो गई है। कभी टीएमसी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब पार्टी का प्रभाव कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। यह क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व लोकसभा सांसद और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी करते हैं।

फलता में टीएमसी की मजबूत पकड़ के पीछे स्थानीय नेता जहांगीर खान का प्रभाव अहम माना जाता था। हालांकि, चुनाव के अंतिम दौर में उनके मैदान छोड़ने के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।


  • कुछ दिनों में बदली राजनीतिक तस्वीर

    29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान फलता क्षेत्र में टीएमसी का जोरदार प्रचार दिखाई दे रहा था। इलाके में पार्टी के झंडे और कार्यकर्ताओं की सक्रिय मौजूदगी थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्र में अन्य दलों के झंडे नजर आ रहे हैं, जबकि टीएमसी की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दे रही है।

    जहांगीर खान भी चुनावी प्रक्रिया से अलग होने के बाद क्षेत्र से गायब बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्हें आखिरी बार मंगलवार को देखा गया था, जिस दिन उन्होंने चुनाव से हटने का फैसला लिया था। गुरुवार को हुए पुनर्मतदान में भी उनकी मौजूदगी नहीं रही।

    अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते थे खान

    जहांगीर खान को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 में इस क्षेत्र में टीएमसी को भारी समर्थन मिला था और पार्टी को 89 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त हुए थे। हालांकि, खान के चुनाव से हटने के बाद पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया।

    शांतिपूर्ण रहा पुनर्मतदान

    गुरुवार को हुए पुनर्मतदान में 86 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। मतदान के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती रही और प्रक्रिया शांतिपूर्ण बताई गई। इससे पहले 29 अप्रैल को हुए मतदान में कई बूथों पर ईवीएम से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद पुनर्मतदान कराया गया।

    भाजपा और वाम दलों के बीच मुकाबला

    जहांगीर खान के हटने के बाद फलता सीट पर टीएमसी की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। अब मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और माकपा के शंभूनाथ कुर्मी के बीच माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक मोल्ला मैदान में हैं।

    भवानीपुर के बाद नया राजनीतिक संकट

    फलता में कमजोर होती पकड़ को टीएमसी के लिए एक और राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भवानीपुर सीट पर भी पार्टी को झटका लगने की खबरें चर्चा में रही थीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में बदलते समीकरणों का असर अब टीएमसी के पारंपरिक गढ़ों पर भी दिखाई देने लगा है।

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