img-fluid

ऑफिस का ट्रैकिंग ऐप बना जासूस! गूगल-फेसबुक को बेच रहा आपका निजी डेटा

May 24, 2026

डेस्क: ऑफिस में हाजिरी, स्क्रीन टाइम और काम की निगरानी करने वाले ऐप अब सिर्फ कर्मचारियों की एक्टिविटी ही नहीं देख रहे, बल्कि उनका निजी डेटा भी रिकॉर्ड कर रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं यह डेटा गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों तक भी पहुंच रहा है. एक नई स्टडी में यह खुलाया किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कई लोकप्रिय वर्कप्लेस मॉनिटरिंग ऐप कर्मचारियों की जानकारी गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं. इसमें नाम, ईमेल, लोकेशन और डिवाइस डेटा तक शामिल है. रिपोर्ट ने डिजिटल प्राइवेसी और वर्कप्लेस सर्विलांस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कोलंबिया लॉ स्कूल, नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी, वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले के रिसर्चर्स ने 9 लोकप्रिय वर्कप्लेस मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म की जांच की. इनमें हबस्टाफ, टाइम डॉक्टर, डेप्युटी, मोनिटास्क और डेस्कलॉग जैसे ऐप शामिल रहे. ये प्लेटफॉर्म कंपनियों को कर्मचारियों के काम के घंटे, स्क्रीनशॉट, कीबोर्ड एक्टिविटी, लोकेशन और प्रोडक्टिविटी ट्रैक करने की सुविधा देते हैं. रिसर्च के दौरान एक्सपर्ट्स ने वर्कर और मैनेजर अकाउंट बनाकर डेटा फ्लो का एनालिसिस किया. जांच में सामने आया कि सभी नौ प्लेटफॉर्म किसी न किसी रूप में कर्मचारियों का डेटा बाहरी कंपनियों के साथ साझा कर रहे थे. रिसर्चर्स के मुताबिक यह ट्रेंड अब तेजी से बढ़ता डिजिटल सर्विलांस मॉडल बन चुका है.


  • रिपोर्ट के अनुसार, इन ऐप्स ने कर्मचारियों के नाम, ईमेल एड्रेस, कंपनी डिटेल और डिवाइस जानकारी जैसी निजी सूचनाएं कई थर्ड पार्टी कंपनियों के साथ साझा कीं. रिसर्च में कुल 121 ऐसे मामले सामने आए जहां डेटा फेसबुक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एपलविन जैसी कंपनियों तक पहुंचा. इसके अलावा आईपी एड्रेस, इस्तेमाल किए गए वेबसाइट्स और डिवाइस डिटेल जैसी संवेदनशील जानकारियां भी 145 बाहरी कंपनियों को भेजी गईं. इनमें लिंक्डइन, बिंग और यांडेक्स जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल थे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह डेटा आगे विज्ञापन, यूजर बिहेवियर एनालिसिस और अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो सकता है. रिपोर्ट ने इसे कर्मचारियों की डिजिटल प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बताया है.

    स्टडी में यह भी सामने आया कि कई बॉसवेयर ऐप कर्मचारियों की सटीक लोकेशन ट्रैक करने में सक्षम हैं. कुछ प्लेटफॉर्म बैकग्राउंड में चलते हुए भी लोकेशन डेटा रिकॉर्ड करते रहे, यहां तक कि कर्मचारी काम के समय से बाहर भी हों तब भी ट्रैकिंग संभव रही. रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह की निगरानी कर्मचारियों की निजी जिंदगी तक दखल पैदा कर सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि वर्कप्लेस को “अनचेक्ड सर्विलांस” का नया केंद्र नहीं बनने देना चाहिए. एक्सपर्ट्स ने कहा कि ज्यादातर कर्मचारियों के पास ऐसे ऐप इस्तेमाल करने से मना करने का विकल्प नहीं होता, क्योंकि नौकरी खोने का डर बना रहता है. यही वजह है कि डेटा सुरक्षा को लेकर नए नियमों की मांग तेज हो रही है.

    रिपोर्ट के मुताबिक कई मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म अब उसी बिजनेस मॉडल पर काम कर रहे हैं जो लंबे समय से कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियां अपनाती रही हैं. यानी ज्यादा से ज्यादा डेटा इकट्ठा करना, लंबे समय तक स्टोर रखना और बाद में उसका अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करना. शोधकर्ताओं ने कहा कि कंपनियां यह भी समझने की कोशिश करती हैं कि कर्मचारी किस समय ऐप इस्तेमाल कर रहा है, कौन से नेटवर्क से जुड़ा है और उसका व्यवहार कैसा है. इन जानकारियों के जरिए कर्मचारियों की आदतों, जुड़ाव और यहां तक कि नौकरी बदलने की संभावनाओं का अनुमान लगाया जा सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस तरह की डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम नहीं बने, तो आने वाले समय में कर्मचारियों की डिजिटल आजादी और आर्थिक सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

    Share:

  • अडाणी ग्रुप मुसीबतों से बाहर निकला, ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी बोली- विदेशी निवेश मिलने की...

    Sun May 24 , 2026
    नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने कहा है कि अडाणी ग्रुप से जुड़े बड़े विवाद और अमेरिकी नियामकीय जांच का जोखिम अब काफी हद तक पीछे छूट चुका हैं। इससे ग्रुप में विदेशी निवेश और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है। ब्रोकरेज कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में ग्रुप की 4 प्रमुख लिस्टेड कंपनियों- […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved