बेंगलुरु। मुंह के कैंसर (cancer) के उपचार को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नए शोध (New Research) में सामने आया है कि नियंत्रित अल्ट्रासाउंड तकनीक कैंसर कोशिकाओं (New Research) को कमजोर करने और आंशिक रूप से नष्ट करने में सक्षम हो सकती है, जबकि इसका प्रभाव सामान्य स्वस्थ कोशिकाओं पर काफी सीमित रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक कैंसर के मौजूदा इलाज को और प्रभावी बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
यह शोध इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु और एमएस रमैय्या मेडिकल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Materials Today Bio में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार नियंत्रित अल्ट्रासाउंड से उत्पन्न हल्का यांत्रिक दबाव (Mechanical Stress) कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इसके विपरीत, स्वस्थ कोशिकाएं इस प्रभाव को काफी हद तक सहन कर लेती हैं, जिससे उपचार के दौरान सामान्य ऊतकों को होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि कैंसर कोशिकाओं में ट्रोपोमायोसिन 2.1 (Tropomyosin 2.1) नामक प्रोटीन का स्तर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कम होता है। इसी कारण वे अल्ट्रासाउंड के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं और तेजी से नष्ट होने लगती हैं।
अध्ययन में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि अल्ट्रासाउंड ट्यूमर के चारों ओर बनने वाली घनी संरचना को भी कमजोर कर सकता है। यह परत अक्सर दवाओं और शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ट्यूमर तक पहुंचने से रोकती है, जिससे इलाज का असर कम हो जाता है।
यदि इस सुरक्षा कवच को कमजोर किया जा सके, तो भविष्य में कैंसररोधी दवाएं और इम्यून कोशिकाएं ट्यूमर तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी और उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
शोध के मुताबिक अल्ट्रासाउंड तकनीक केवल कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलने की क्षमता (Migration) को भी कम कर सकती है। इससे शरीर के अन्य अंगों में कैंसर फैलने यानी मेटास्टेसिस का खतरा घटाने में मदद मिल सकती है।
भारत में मुंह के कैंसर के मामले दुनिया में सबसे अधिक दर्ज होने वाले देशों में शामिल हैं। फिलहाल इसके इलाज के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इन तरीकों में कैंसर कोशिकाओं के साथ स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में अल्ट्रासाउंड आधारित यह नई तकनीक भविष्य में कम दुष्प्रभाव वाले उपचार का विकल्प बन सकती है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है। इसे मरीजों के नियमित उपचार का हिस्सा बनने से पहले व्यापक प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षणों से गुजरना होगा। यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह तकनीक मुंह के कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
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