वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) ने पश्चिम एशिया में संभावित शांति व्यवस्था और क्षेत्रीय गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप (Trump)ने कहा है कि मध्य पूर्व में स्थायी स्थिरता के लिए मुस्लिम देशों और (Israel) के बीच संबंध सामान्य करना जरूरी होगा।
बताया जा रहा है कि ट्रंप ने कुछ प्रमुख मुस्लिम देशों से Abraham Accords जैसे समझौतों का दायरा बढ़ाने की अपील की है। हालांकि Pakistan ने इस विचार को लेकर अपना पुराना रुख दोहराते हुए किसी भी बदलाव से इनकार कर दिया है।
पाकिस्तान के नेताओं ने साफ कहा है कि उनकी नीति फिलिस्तीन मुद्दे से जुड़ी पुरानी स्थिति पर आधारित है। पाकिस्तान का कहना है कि जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होती और पूर्वी यरुशलम उसकी राजधानी नहीं बनता, तब तक वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि देश अपनी विदेश नीति और वैचारिक रुख से समझौता नहीं करेगा।
अब्राहम समझौते अमेरिका की मध्यस्थता में 2020 में शुरू हुई एक कूटनीतिक पहल थी। इसका उद्देश्य अरब देशों और इजरायल के बीच दशकों पुराने तनाव को कम करना और राजनयिक संबंध स्थापित करना था।
इस पहल के तहत United Arab Emirates, Bahrain, Morocco और Sudan जैसे देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए। इसके बाद व्यापार, पर्यटन, सीधी उड़ानों और सुरक्षा सहयोग में भी वृद्धि हुई।
रिपोर्टों में यह भी चर्चा है कि यदि भविष्य में पाकिस्तान कभी इजरायल को मान्यता देता है, तो उसे अपने पासपोर्ट से जुड़ी नीति में बदलाव करना पड़ सकता है। वर्तमान में पाकिस्तानी पासपोर्ट पर यह उल्लेख होता है कि वह “इजरायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों” के लिए मान्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कभी नीति बदली जाती है, तो यह पाकिस्तान में बड़ा राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार ने किसी भी संभावित बदलाव से साफ इनकार किया है।
ट्रंप के बयान के बाद पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी के लिए नए गठबंधन बनाने की कोशिश कर सकता है। वहीं कई मुस्लिम देशों में फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर घरेलू राजनीतिक दबाव अब भी मजबूत बना हुआ है।
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