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भारत के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट ने बढ़ाई चीन-पाकिस्तान की चिंता

May 28, 2026

नई दिल्ली। भारत ने रक्षा क्षेत्र (India defense sector) में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) को आगे बढ़ाते हुए निजी कंपनियों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम को भारतीय रक्षा उद्योग के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, एरोनॉटिकल डिवलपमेंट एजेन्सी (ADA) और रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के लिए देश की तीन प्रमुख रक्षा कंपनियों/कंसोर्टियम को अनुरोध प्रस्ताव (RFP) भेजे हैं।


  • इन कंपनियों को मिला प्रस्ताव

    जानकारी के अनुसार प्रस्ताव भेजे गए प्रमुख समूहों में:

    • Tata Advanced Systems
    • Larsen & Toubro और Bharat Electronics Limited का कंसोर्टियम
    • Bharat Forge, BEML और Data Patterns समूह

    शामिल बताए जा रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना की खास बात यह है कि सरकारी रक्षा कंपनी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को शुरुआती प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

    15 हजार करोड़ रुपये की परियोजना

    सूत्रों के मुताबिक, चुनी गई कंपनी को करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से एएमसीए के पांच प्रोटोटाइप विकसित करने होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन प्रोटोटाइप्स को 2031 तक तैयार कर लिया जाए।

    यह परियोजना भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम मौजूद हैं।

    क्या है स्टील्थ फाइटर जेट?

    स्टील्थ फाइटर जेट ऐसे लड़ाकू विमान होते हैं जिन्हें दुश्मन के रडार, इंफ्रारेड सेंसर और निगरानी प्रणालियों से बचने के लिए विशेष तकनीक से डिजाइन किया जाता है।

    इन विमानों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, इंजन डिजाइन और एयरफ्रेम संरचना ऐसी होती है कि उनकी रडार पहचान बेहद कम हो जाती है। इन्हें “लो ऑब्जर्वेबल एयरक्राफ्ट” भी कहा जाता है।

    दुनिया के प्रमुख स्टील्थ फाइटर जेट्स में:

    • F-35 Lightning II
    • F-22 Raptor
    • Chengdu J-20
    • Sukhoi Su-57

    शामिल हैं।

    दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला करने में सक्षम

    विशेषज्ञों के अनुसार, स्टील्थ तकनीक आधुनिक युद्ध में बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि इससे विमान दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर मिशन पूरा कर सकते हैं।

    इनमें अत्याधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, सुपरक्रूज तकनीक और आधुनिक हथियार प्रणालियां लगाई जाती हैं। हालांकि स्टील्थ तकनीक किसी विमान को पूरी तरह अदृश्य नहीं बनाती, लेकिन उसकी पहचान और ट्रैकिंग को काफी मुश्किल जरूर बना देती है।

    तेजस के बाद अगला बड़ा लक्ष्य

    भारत पहले ही HAL Tejas लड़ाकू विमान विकसित कर चुका है। अब एएमसीए परियोजना को भारतीय वायुसेना के भविष्य के लिए सबसे अहम कार्यक्रमों में गिना जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से न केवल भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश में निजी रक्षा उद्योग और स्वदेशी सैन्य तकनीक को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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