
नई दिल्ली। बीमा पॉलिसी लेने के बाद क्लेम के लिए महीनों तक चक्कर लगाने वाले ग्राहकों के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। बीमा कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए IRDAI ने सख्त कदम उठाए हैं। नए नियमों के तहत अब कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर क्लेम का निपटारा करना होगा। इतना ही नहीं, देरी होने पर कंपनियों के बड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इससे करोड़ों पॉलिसीधारकों को तेज और पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
IRDAI के नए निर्देशों के मुताबिक अब बीमा कंपनियों को हर 15, 30 और 60 दिन के भीतर क्लेम से जुड़ी पूरी जानकारी ग्राहकों को देनी होगी। कंपनियों को बताना पड़ेगा कि कितने क्लेम मंजूर हुए, कितने खारिज किए गए और कितने मामलों में भुगतान लंबित है। इसका मकसद ग्राहकों को बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने से बचाना है।
अब अगर कोई ग्राहक अपनी बीमा पॉलिसी में पता, मोबाइल नंबर या नॉमिनी बदलवाना चाहता है, तो कंपनी को यह काम 7 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। अगर तय समय में काम नहीं हुआ तो इसे शिकायत माना जाएगा और कंपनी की जवाबदेही तय होगी।
IRDAI ने पहली बार बीमा कंपनियों के MD और CEO की जिम्मेदारी सीधे ग्राहक सेवा से जोड़ दी है। नए नियमों के तहत अधिकारियों का बोनस और अतिरिक्त वेतन इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी कितनी तेजी और पारदर्शिता से क्लेम का निपटारा कर रही है। अगर कंपनी ग्राहकों को सही जानकारी नहीं देती या वेबसाइट पर जरूरी डेटा अपलोड नहीं करती, तो अधिकारियों का बोनस रोका जा सकता है।
IRDAI ने बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली को परखने के लिए छह बड़े मापदंड तय किए हैं। इसमें कंपनी की आर्थिक स्थिति, पॉलिसी की पूरी जानकारी, क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड, शिकायत निपटान, लेखा मानकों का पालन और ग्राहकों को गुमराह करने वाले तरीकों पर नजर रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद क्लेम प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और तेज होगी। ग्राहकों को समय पर पैसा मिलने की संभावना बढ़ेगी और बीमा कंपनियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव रहेगा। खास बात यह है कि अब कंपनियां ग्राहकों को लंबे समय तक परेशान नहीं कर पाएंगी।
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