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पानी रे पानी तेरा रंग कैसा… न मिले तो जग को तरसा दे वैसा…

May 29, 2026

हम पेट्रोल की कीमत जानते हैं, पानी की नहीं… क्योंकि पानी मुफ्त में मिलता है और न मिले तो हर शख्स पूरे अधिकार के साथ घर से छाती पीटते हुए…सडक़ों पर नारे लगाते हुए चक्काजाम कर भड़ास निकालते हुए दिखता है… मुफ्त के पानी को वो अधिकार समझता है, लेकिन यह नहीं सोचता है कि जब पानी नहीं रहेगा तो कैसे मिलेगा… पानी को बचाने… पानी को जमीन में उतारने… पानी को पानी मानने के लिए कभी कोई प्रयास नहीं करना… नलों से बहता पानी हो या सडक़ों पर ढुलता पानी, कभी कोई उसके इस हश्र पर आक्रोश नहीं जताता… नल बंद करने तक की जहमत नहीं उठाता…लेकिन न मिले तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है… फिर पानी भी अपना रूप दिखाता है… सूरज की तपिश से भाप बनकर उसी हवा में घुल जाता है, जिस तरह हर फिक्र को इंसान हवा में उड़ाता है… इंसान अनाज के बिना एक-दो दिन रह सकता है, लेकिन पानी के बिना चंद घंटे भी नहीं गुजार सकता है…लेकिन फिर भी उसकी कीमत नहीं जानता है…सरकार भी पानी को अपनी जिम्मेदारी मानती है, इसलिए टैंकर भर-भरकर हर साल घरों तक पहुंचाती है… ऐसी कोई तैयारी नहीं की जाती है कि ईश्वर की सौगात बनकर बरसने वाले पानी को जहां का तहां सहेजा जाए… जमीन के गर्भ तक पानी पहुंचाया जाए… ताकि हम सालभर पानी उलीच सकें और गर्मी के मौसम के लिए सहेज सकें… लेकिन सरकार को भी पानी के लिए तरसाने और टैंकरों में पैसा बहाने में आनंद आता है… नेताओं को भी टैंकर मंगवाकर पानी बंटवाने में राजनीति का स्वाद नजर आता है… इसलिए पानी के साथ हर वो नादानी की जाती है, जिससे उसकी कीमत वसूली जाती है… सरकार हर छत से बिजली के लिए सौर ऊर्जा का अभियान चलाती है…वहां लोगों की बुद्धि चल जाती है, क्योंकि बिजली पैसे देकर आती है और सूरज से मिली बिजली उनका बिल घटाती है…लेकिन पानी की कीमत इस देश में कभी समझी नहीं जाती है…यहां तक कि उद्योगों को भी पानी मुफ्त में मिलता है और उद्योग चलाने वाला उसी पानी में रंग मिलाकर कभी कोक तो कभी फेंटा बनाकर…कभी बीयर तो कभी शराब बनाकर बेचने निकल पड़ता है…जिस देश में पानी न हो वो देश पानी की कीमत समझता है…इसलिए दुबई जैसे देश में पाकिस्तान से मिट्टी खरीदकर पौधे लगाए गए और देश को इतना लहलहा दिया कि कभी न बरसने वाला पानी अब उस देश में भी जमकर बरसता है और हम हैं कि पेड़ों को काटकर बिल्डिंगें बना रहे हैं…उन्हीं बिल्डिंगों के लिए पानी जमीन से उलीचकर निकाल रहे हैं… पर्यावरण का ढोंग कर भाषण पिला रहे हैं…न हम अपनी आदत से न नीयत से बाज आ रहे हैं… इसलिए पानी अपना रंग दिखा रहा है…कीमत न समझने वालों को तरसा रहा है…अभी और आज भी वक्त है कि टैंकरों से पानी बांटने में…पानी खरीदकर लाने में…पानी खोदकर निकालने में खर्च करने के बजाय पानी सहेजने में खर्च करें और वक्त लगाएं…बारिश के पहले जल पुनर्भरण के लिए अनुरोध और अपील के बजाय सख्त कानून बनाएं…प्रशासन खुद भी सरकारी बोरिंगों के पास वाटर रिचार्जिंग के स्रोत बनाए…तालाबों और जलाशयों से अतिक्रमण हटाए…जल की समस्या गहराने से पहले उन्हें गहरा कराए और जो विरोधी पानी-पानी करके नारे लगाते लोगों की तकलीफों पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते गली-गली में नजर आ रहे हैं, वो भी बजाय विरोध की राजनीति के जनजागरण अभियान चलाएं और शहर के साथ प्रदेश को भी जल की संपदा से मालामाल बनाएं…


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    Fri May 29 , 2026
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