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MP के ‘बंगला पान’ की विदेशों में मांग, किसानों के लिए सरकार लाई विशेष योजना, देगी ₹1 करोड़ की मदद

May 30, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का मशहूर ‘बंगला पान’ (Bangla Paan) अब देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में भी अपनी पहचान बना रहा है। खासकर छतरपुर जिले (Chhatarpur District) में उगाया जाने वाला यह पान अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी काफी पसंद किया जा रहा है।

पान की बढ़ती मांग और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत राज्य के प्रमुख पान उत्पादक जिलों के लिए 1 करोड़ 3 लाख रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है।

किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ
सरकारी योजना के तहत पान उत्पादकों को उन्नत खेती तकनीक, बेहतर पौध सामग्री, विशेष प्रशिक्षण और पारंपरिक ‘बरोज’ संरचना के निर्माण के लिए आर्थिक एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता में भी सुधार करना है।

इन जिलों में होती है प्रमुख खेती
प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ जिले पान उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। यहां बड़ी संख्या में किसान वर्षों से पान की खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। रीवा जिले के महसांव क्षेत्र के कुछ गांवों में तैयार होने वाला पान भी अपनी अलग पहचान रखता है। यहां का पान उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ जैसे बड़े बाजारों में भेजा जाता है, जहां इसकी काफी मांग है।


  • क्या है ‘बरोज’ मॉडल?
    पान की खेती के लिए विशेष प्रकार की संरक्षित व्यवस्था तैयार की जाती है, जिसे ‘बरोज’ कहा जाता है। यह एक ऊंचा और नियंत्रित ढांचा होता है, जिसमें तापमान और नमी को संतुलित रखा जाता है ताकि पान की नाजुक बेलों का बेहतर विकास हो सके। मध्य प्रदेश में विशेष रूप से चौरसिया समाज पीढ़ियों से इस खेती से जुड़ा हुआ है और पारंपरिक तरीके से बरोज बनाकर पान उत्पादन करता आ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसी मॉडल की वजह से प्रदेश का पान अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।

    चुनौतियों के बावजूद कायम है मांग
    हाल के वर्षों में पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों के बढ़ते चलन ने पारंपरिक पान कारोबार को चुनौती दी है। इससे किसानों की आय पर भी असर पड़ा है। इसके बावजूद धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में पान का महत्व बरकरार है। विवाह समारोह, पूजा-पाठ, मांगलिक कार्यों और अतिथि सत्कार में आज भी पान को विशेष स्थान प्राप्त है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग स्थिर बनी हुई है और निर्यात के नए अवसर किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आए हैं।

    सरकार को उम्मीद, किसानों की बढ़ेगी आमदनी
    राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता के जरिए पान उत्पादन को नया विस्तार मिलेगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि मध्य प्रदेश का पान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत पहचान बना सकेगा।

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