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पाकिस्तान जाने वाले पानी पर नियंत्रण की दिशा में भारत की दो बड़ी सुरंग परियोजनाएं, 2600 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश

May 30, 2026

नई दिल्ली। भारत ने सिंधु बेसिन की नदियों (Rivers of the Indus Basin) के जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में दो महत्वपूर्ण सुरंग (Tunnel) परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 2600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। परियोजनाओं का उद्देश्य जल प्रबंधन क्षमता बढ़ाना, भंडारण में सुधार करना और उपलब्ध जल का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।



  • सिंधु बेसिन की छह प्रमुख नदियों के जल बंटवारे को लेकर हुए Indus Waters Treaty के तहत सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों का अधिकांश जल उपयोग पाकिस्तान को तथा रावी, ब्यास और सतलुज का उपयोग भारत को प्राप्त है। हाल के वर्षों में भारत ने अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर बढ़ाया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, नदी जल को पूरी तरह रोकना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होता, लेकिन जल के प्रवाह, भंडारण और उपयोग के लिए आवश्यक संरचनाएं विकसित कर उसके प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसी दिशा में दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम प्रस्तावित है।

    चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना पर 2352 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च

    प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना की लागत लगभग 2352 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस योजना के तहत करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जाएगा। पहले चरण में Lahaul Valley में नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा। इसके बाद हाइड्रोलिक संरचनाओं और सुरंग की सहायता से Chandra River के जल को Beas Basin की ओर मोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    सलाल परियोजना में गाद निकासी के लिए बनेगी नई सुरंग

    दूसरी परियोजना Salal Hydroelectric Power Station से जुड़ी है, जिस पर लगभग 268 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस योजना के तहत एक नई डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बाईपास टनल बनाई जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली मिट्टी और तलछट के कारण परियोजना में बड़ी मात्रा में गाद जमा हो चुकी है, जिससे जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय कमी आई है। नई सुरंग के माध्यम से तलछट निकासी की प्रक्रिया को बेहतर बनाकर जलाशय की उपयोगिता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    दीर्घकालिक जल प्रबंधन पर फोकस

    दोनों परियोजनाओं को दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इनके पूरा होने से जल भंडारण, प्रवाह नियंत्रण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रकार की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं को पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं, लेकिन इनके माध्यम से सिंधु बेसिन क्षेत्र में जल प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

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