
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब पीने से करने वालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है. इस दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है.वहीं जबकि कई अन्य लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है. घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस और राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के 21 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है.
सीएम देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर काम में लापरवाही और निगरानी में कमी के आरोप में निलंबन की यह कार्रवाई की गई है. प्रशासन का मानना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो यह घटना टाली जा सकती थी. इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।
हडपसर के काळेपडळ इलाके में दो और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 24 हो गई. मृतकों में 60 वर्षीय विकास किसन केदारी (60) और 45 वर्षीय निलेश घोलप (45) शामिल हैं. इससे पहले फुगेवाड़ी और उरुळी कांचन क्षेत्रों से भी मौतों की खबरें सामने आई थीं.
जांच के दौरान इस जहरीली शराब कांड के तार ठाणे जिले के भिवंडी से जुड़ते नजर आ रहे हैं. खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भिवंडी के एक गोदाम पर छापा मारकर 5,929 लीटर मेथेनॉल बरामद किया है. शुरूआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इसी मेथेनॉल का इस्तेमाल जहरीली शराब बनाने में किया गया था.
राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में व्यापक छापेमारी अभियान चलाकर 4,480 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की है. इसके अलावा शराब निर्माण में उपयोग किए जा रहे करीब 42 हजार लीटर रासायनिक पदार्थ को भी नष्ट कर दिया गया है. मामले में अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
पुणे कांड के बाद राज्यभर में अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है. नागपुर में पुलिस और उत्पाद शुल्क विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 43 स्थानों पर छापेमारी की और 56 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए.
मृतकों के विसेरा नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद मौतों के सटीक कारणों का खुलासा होगा. वहीं राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता निधि से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.
पुणे ग्रामीण के मुळशी तालुका के रिहे, कातरखडक, घोटावडे, माले, आंबवणे, भादस, मुठा और करमोळी क्षेत्रों में पुलिस ने अवैध शराब के अड्डों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 से 12 हाथभट्टी शराब भट्टियों को ध्वस्त कर दिया है.
पुलिस, उत्पाद शुल्क विभाग और एफडीए की संयुक्त टीमें पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जहरीली शराब बनाने में इस्तेमाल हुआ मेथेनॉल कहां से आया और इसकी सप्लाई चेन में कौन-कौन लोग शामिल थे.
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