वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में समुद्री तनाव (Maritime tensions in West Asia) लगातार गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी सैन्य कमान (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान से जुड़े समुद्री मार्गों (sea routes) पर निगरानी और दबाव बढ़ाने के तहत कई व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा जानकारी के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई के तहत ईरान की ओर जाने या वहां से आने वाले अनेक जहाजों का मार्ग बदला गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह नौसैनिक निगरानी अभियान 13 अप्रैल से जारी है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान के बंदरगाहों की ओर बढ़ने वाले जहाजों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है और आवश्यक होने पर हस्तक्षेप भी किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत में भी अनिश्चितता बनी हुई है। कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया था कि समझौता करीब है, लेकिन बाद की रिपोर्टों में दावा किया गया कि प्रस्तावित मसौदे पर नई शर्तें जोड़ने की मांग सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अधिक सख्त नियंत्रण, Strait of Hormuz में निर्बाध समुद्री आवाजाही की गारंटी और आर्थिक रियायतों को सीमित रखने जैसे मुद्दों पर जोर दे रहा है। वहीं, ईरान ने कथित तौर पर अपने अधिकारों और सुरक्षा हितों से समझौता न करने का संकेत दिया है।
ईरानी नेतृत्व की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि जब तक ईरान के हित सुरक्षित नहीं होते, तब तक किसी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, अमेरिकी सांसद Chris Coons ने ट्रंप की शर्तों को व्यवहारिक स्तर पर लागू करना चुनौतीपूर्ण बताया है।
फिलहाल, क्षेत्र में बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव पर वैश्विक नजर बनी हुई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय तेल और व्यापारिक आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में गिना जाता है।
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