
जबलपुर। महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के लाखों कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में करीब ढाई दशक बाद कैंसर उपचार की तस्वीर बदलने जा रही है। अब तक पुरानी कोबाल्ट मशीनों के सहारे इलाज करा रहे मरीजों को जल्द ही अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेटर मशीन से रेडिएशन थेरेपी की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कैंसर की सटीक जांच के लिए पीईटी-सीटी स्कैन मशीन भी स्थापित की जा रही है। यह सुविधा शुरू होने के बाद जबलपुर न केवल संभाग बल्कि पूरे महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र का सबसे बड़ा आधुनिक कैंसर उपचार केंद्र बनकर उभरेगा।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में सुरक्षा मानकों वाला विशेष बंकर तैयार
मशीन की स्थापना के लिए स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में विशेष सुरक्षा मानकों वाला हाई-टेक बंकर पहले ही तैयार किया जा चुका है। मशीन के अलग-अलग पार्ट्स जबलपुर पहुंचने शुरू हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक मशीन को कई चरणों में स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में आए हुए उपकरणों को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्टोर में रखा गया है। तकनीकी टीम द्वारा इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीन का ट्रायल और कैलिब्रेशन किया जाएगा।
इस साल के अंत तक शुरू हो सकती है सारी सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार लीनियर एक्सीलेटर मशीन की स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है। यदि सब कुछ तय समय पर हुआ तो इसी वर्ष के अंत तक मरीजों को इस हाईटेक सुविधा का लाभ मिलने लगेगा। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में लीनियर एक्सीलेटर मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके पार्ट्स पहुंच रहे हैं। साथ ही पीपीपी मोड पर पीईटी-सीटी स्कैन मशीन भी स्थापित की जा रही है।
फैक्ट फाइल
पीपीपी मोड पर मिलेगी पीईटी-सीटी स्कैन सुविधा
कैंसर की पहचान और उसकी स्टेजिंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांचों में शामिल पीईटी-सीटी स्कैन सुविधा भी मेडिकल कॉलेज में शुरू की जा रही है। यह सुविधा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित होगी। अभी मरीजों को पीईटी-सीटी स्कैन के लिए निजी संस्थानों में भारी रकम खर्च करनी पड़ती है या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। नई सुविधा शुरू होने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
हर साल हजारों मरीजों को मिलेगा फायदा
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में प्रतिवर्ष हजारों कैंसर मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें जबलपुर के अलावा कटनी, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, सागर, पन्ना, सतना, रीवा, शहडोल और उमरिया सहित कई जिलों के मरीज शामिल होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई मशीन लगने के बाद मरीजों को अत्याधुनिक इलाज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा और उपचार की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा।
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