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ईरान वॉर और खुद की मनमानी से डूबी इंडिगो! 30% तक गिर गए हैं शेयर

June 04, 2026

नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइन IndiGo के लिए साल 2026 चुनौतियों से भरा साबित हो रहा है. एक तरफ कंपनी को नए ड्यूटी नियमों के कारण पायलटों की कमी और ऑपरेशनल बाधाओं का सामना करना पड़ा, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने उसके खर्चों में भारी बढ़ोतरी कर दी. इन दोनों मोर्चों पर बढ़ते दबाव का असर कंपनी के शेयर और वित्तीय प्रदर्शन पर साफ दिखाई देने लगा है. पिछले एक साल में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और कंपनी का शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 30% नीचे आ चुका है.

इंडिगो की परेशानी फरवरी में शुरू हुई, जब नए Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियम लागू किए गए. इन नियमों के तहत पायलटों और क्रू के काम करने के घंटों में बदलाव करना पड़ा. इससे एयरलाइन के सामने पायलटों की उपलब्धता का संकट खड़ा हो गया और कई उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ. क्रू शेड्यूलिंग में बदलाव की वजह से कंपनी को परिचालन स्तर पर काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इससे यात्रियों को भी असुविधा हुई और एयरलाइन की दक्षता पर असर पड़ा.


  • जब कंपनी इन समस्याओं से उबरने की कोशिश कर रही थी, तभी इज़राइल-ईरान संघर्ष और उसमें अमेरिका की भागीदारी ने ग्लोबल एविएशन सेक्टर की मुश्किलें बढ़ा दीं. कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए, जिससे एयरलाइनों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा. लंबे रूट का सीधा असर ईंधन की खपत और परिचालन लागत पर पड़ा. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को भी ऊपर धकेला. चूंकि एयरलाइनों के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी 40-60% तक होती है, इसलिए लागत में बढ़ोतरी ने मुनाफे पर बड़ा दबाव बनाया.

    निवेशकों ने इन जोखिमों को देखते हुए इंडिगो के शेयरों में बिकवाली की. कंपनी का शेयर अगस्त 2025 में बने 6,232 रुपये के रिकॉर्ड स्तर से करीब 30% नीचे आ चुका है. वहीं पिछले छह महीनों में इसमें लगभग 20% की गिरावट दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी को 2,536 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 3,067 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. हालांकि कंपनी की परिचालन आय 1% बढ़कर 22,438 करोड़ रुपये रही.

    विश्लेषकों का मानना है कि इंडिगो का भविष्य काफी हद तक तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर निर्भर करेगा. हालांकि सरकार ने एयरलाइन सेक्टर को राहत देने के लिए 100 अरब रुपये का ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड मंजूर किया है. इससे एयरलाइनों को ईंधन कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से कुछ सुरक्षा मिल सकती है. अगर तेल की कीमतें स्थिर होती हैं और क्षेत्रीय तनाव कम होता है, तो इंडिगो को राहत मिल सकती है. लेकिन फिलहाल कंपनी के सामने परिचालन और लागत दोनों मोर्चों पर चुनौतियां बनी हुई हैं, जिन पर निवेशकों की नजर टिकी रहेगी.

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