
परेशान जमीन मालिक ने जब की शिकायत तो गलती सुधारी, लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) के राजस्व विभाग (Department of Revenue) का एक और नया कारनामा सामने आया है। इस कारनामे के तहत धार रोड स्थित एक जमीन के करोड़ों रुपए कीमत के 3600 वर्गफीट (3,600 sq. ft. of land) के भाग को किराएदार के नाम पर चढ़ा दिया गया। इसकी शिकायत जब जमीन मालिक ने की तो बड़ी मुश्किल से निगम ने सुनवाई की। अब पूरी जमीन मकान मालिक के नाम पर कर दी गई है, लेकिन यह खेल करने वाले दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
निगम के राजस्व विभाग में हुई गड़बड़ी एक के बाद एक सामने आती जा रही हैं। अब जो ताजा मामला सामने आया है, उसके अनुसार लाबरिया भेरू के मकान नंबर 274/2 की राजेंद्र कौर गांधी पति महेंद्र गांधी की संपत्ति है। इसमें 9400 फीट की संपत्ति रजिस्ट्री से मिली। फिर नगर निगम में नाम भी दर्ज हो गया। जमीन मालिक द्वारा हर वर्ष अपनी जमीन का संपत्ति कर नगर निगम में जमा किया जाने लगा। उन्होंने इस जमीन में से 3600 फीट जमीन किराए पर दे दी। नगर निगम के जादूगरों ने गुपचुप तरीके से इस 3600 फीट जमीन पर वनिता पति लालजी पटेल और अन्य के नाम दर्ज कर दिए। इस नाम से संपत्ति कर का अलग से खाता भी खोल दिया गया। यह सब उस स्थिति में किया गया, जब वनिता बाई की मौत हो चुकी है। इस जमीन की कीमत वर्तमान में करोड़ों रुपए है। इस तरह किराएदार द्वारा नगर निगम के कर्मचारियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपए की जमीन पाने का खेल खेला गया था। इस मामले का खुलासा पिछले दिनों उस समय हुआ, जब नगर निगम द्वारा टैक्स बकाया होने के कारण इस जमीन को नीलाम करने की सूचना जारी की गई। इस सूचना पर जब जमीन मालिक नगर निगम के दफ्तर गया तो मालूम पड़ा कि उसकी जमीन का तो बंटवारा हो गया है और एक हिस्सा, जो वनिता के नाम पर दर्ज किया गया था, उसमें टैक्स जमा नहीं हो रहा है। जमीन मालिक राजेंद्र कौर गांधी ने पहले निगम में जाकर शिकायत की तो कुछ नहीं हुआ। फिर अभिभाषक प्रमोदकुमार द्विवेदी के माध्यम से शिकायत उच्च अधिकारियों को की गई। इस शिकायत पर अपर आयुक्त आकाश सिंह ने जांच की। किराएदार को बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद वह दस्तावेज जमा नहीं करवा सका। ऐसी स्थिति में मंगलवार को अपर आयुक्त के कार्यालय से श्रीमती राजेंद्र कौर गांधी को फोन गया और वनिता बाई पटेल व अन्य का नाम हटाकर पूरी जमीन पर उनका नाम चढ़ा दिया गया। अब जमीन मालिक के नाम पर पूरी जमीन तो हो गई, लेकिन यह खेल करने वाले अधिकारी-कर्मचारी पकड़ से बाहर ही रहे। निगम द्वारा न तो दोषियों की पहचान की गई और न ही कार्रवाई की गई।
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