बीजिंग। दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। हाल में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में विवादित Scarborough Shoal के प्रवेश क्षेत्र पर एक संदिग्ध इंफ्रास्ट्रक्चर दिखाई दिया, जिसे बाद की तस्वीरों में हटाया हुआ पाया गया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में चीन की मंशा और उसकी समुद्री रणनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हालांकि, बाद में ली गई तस्वीरों में यह ढांचा नजर नहीं आया। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो इसे अस्थायी रूप से लगाया गया था या फिर किसी रणनीतिक उद्देश्य के बाद हटा लिया गया।
फिलीपींस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। फिलीपींस के रक्षा अधिकारियों के अनुसार, उन्हें इस कथित इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी मिली थी और इसकी प्रकृति तथा उद्देश्य का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
स्कारबोरो शोल लंबे समय से चीन और फिलीपींस के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। चीन ने 2012 में इस क्षेत्र पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था और तब से समय-समय पर यहां पहुंच को सीमित करने के आरोप लगते रहे हैं। चीन इस क्षेत्र को हुआंगयान दाओ नाम से भी संबोधित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में शामिल है, जहां छोटी घटनाएं भी बड़े तनाव में बदल सकती हैं। हाल के वर्षों में चीनी तटरक्षक जहाजों और फिलीपीनी मछुआरों के बीच कई बार टकराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
यह क्षेत्र न केवल रणनीतिक समुद्री मार्गों के करीब है, बल्कि मछली संसाधनों और सुरक्षित जलक्षेत्र के कारण भी अहम माना जाता है। इसी बीच, फिलीपींस और अमेरिका द्वारा संयुक्त समुद्री अभ्यास के तुरंत बाद चीन की नौसेना और तटरक्षक बल की गश्त ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां जारी रहीं, तो दक्षिण चीन सागर में पहले से मौजूद तनाव और गहरा सकता है।
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