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Iran-US War: खामेनेई के दफ्तर पर हमले के वक्त वहीं मौजूद थे अराघची, बोले- सबसे पहले उनकी सलामती की चिंता हुई

June 06, 2026

तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Bbas Araghchi) ने ईरान-अमेरिका (Iran-U.S.) और इजरायल के बीच संघर्ष के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के कार्यालय पर हमला हुआ, उस समय वह भी उसी परिसर में मौजूद थे और किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

लेबनान के टीवी चैनल ‘अल मयादीन’ को दिए एक विशेष इंटरव्यू में, जिसका उल्लेख ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ ने किया है, अराघची ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के शुरुआती घंटों में खामेनेई के दफ्तर को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान उनकी सबसे बड़ी चिंता सुप्रीम लीडर की सुरक्षा को लेकर थी।


  • अराघची के मुताबिक, इमारत को नुकसान पहुंचने और अफरा-तफरी की स्थिति के बीच राहत एवं निकासी कार्य जारी रहे, लेकिन करीब दो दिनों तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि खामेनेई पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि मलबे और तनावपूर्ण हालात के बीच लगातार यही चिंता बनी रही कि देश के सर्वोच्च नेता सुरक्षित हैं या नहीं।

    ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी दावा किया कि कई बार सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दिए जाने के बावजूद खामेनेई ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। अराघची के अनुसार, खामेनेई का मानना था कि जब तक आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तब तक वह खुद भी किसी सुरक्षित शेल्टर में नहीं जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि कठिन हालात और लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद खामेनेई ने नेतृत्व की जिम्मेदारियां नहीं छोड़ीं और हालात की निगरानी के साथ आवश्यक निर्देश देते रहे।

    अराघची ने संघर्ष से पहले खाड़ी क्षेत्र के देशों को दी गई ईरान की चेतावनी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तेहरान ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि ईरान पर हमलों के लिए पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल हुआ, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी बेस नहीं होते, तो वे ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की जद में भी नहीं आते। उनके अनुसार, कई क्षेत्रीय देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए किए जाने का विरोध किया था, लेकिन अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी।

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