नई दिल्ली। गाजा में जारी संघर्ष (Ongoing conflict in Gaza) के बीच फिलीस्तीनी संगठन हमास ने अपने राजनीतिक नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है। संगठन ने खलील अल-हय्या (Khalil Al-Hayya) को नया राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख चुना है। यह पद याह्या सिनवार की मौत के बाद करीब दो वर्षों से खाली था। नए नेतृत्व की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब गाजा में सैन्य तनाव और युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कोशिशें जारी हैं।
खलील अल-हय्या का जन्म 1960 में गाजा पट्टी में हुआ था। उन्हें हमास के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है और वे संगठन की स्थापना के शुरुआती दौर से ही उससे जुड़े रहे हैं। वर्षों से वे हमास के राजनीतिक और कूटनीतिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
इजरायल और हमास के बीच विभिन्न दौर की अप्रत्यक्ष युद्धविराम वार्ताओं में भी अल-हय्या संगठन के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल रहे हैं। इसी वजह से उन्हें हमास के राजनीतिक चेहरे के रूप में भी देखा जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले वर्ष दोहा में हुए एक इजरायली अभियान के दौरान अल-हय्या बाल-बाल बच गए थे। हालांकि उस हमले में उनके परिवार के एक सदस्य की मौत हुई थी। लंबे समय से वे संगठन के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे हैं और हमास के भीतर प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती है।
हमास के भीतर हुए नेतृत्व चुनाव में अल-हय्या ने वरिष्ठ नेता खालिद मशाल को पीछे छोड़ते हुए राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख का पद हासिल किया। संगठन का कहना है कि सुरक्षा कारणों और मौजूदा हालात को देखते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया गोपनीय तरीके से संपन्न कराई गई।
अल-हय्या के चयन के साथ ही याह्या सिनवार की मौत के बाद संगठन का कामकाज संभाल रही अंतरिम नेतृत्व परिषद को भी भंग किए जाने की तैयारी है।
हमास के अनुसार, आने वाले दिनों में संगठन का राजनीतिक ब्यूरो इस्तांबुल में बैठक करेगा। इस बैठक में नई समितियों, संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। अल-हय्या के जल्द औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने की उम्मीद है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हमास की सैन्य शाखा ‘इज्जेदीन अल-कसम ब्रिगेड’ ने भी नए राजनीतिक नेतृत्व के प्रति समर्थन जताया है।
अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हुए हमले के बाद शुरू हुए युद्ध में हमास को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। संगठन के कई शीर्ष नेताओं की मौत हो चुकी है और उस पर हथियार छोड़ने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बना हुआ है।
इसी बीच गाजा में युद्धविराम के प्रयास समय-समय पर होते रहे हैं, हालांकि क्षेत्र में सैन्य अभियान पूरी तरह नहीं रुके हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एक अनुभवी वार्ताकार के रूप में पहचाने जाने वाले खलील अल-हय्या के नेतृत्व का भविष्य की वार्ताओं और गाजा की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
फिलहाल, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से खलील अल-हय्या की नियुक्ति पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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