
- जहाँ शव खुद खोलते हैं अपनी मौत का राज-पता चल जाता है कैसे हुई मौत
उज्जैन। पोस्टमाटर्म रूम..जहाँ मुर्दे खुद बोलते हैं कि उन्हें किसी ने या फिर खुद ने खुद को कैसे मारा…कुल मिलाकर किसी भी हास्पिटल का पीएम हाउस वह जगह है, जहाँ मुर्दे और डेडबॉडी खुद ही चीखकर बताते हैं कि आखिर उनकी मौत का राज क्या है..बशर्ते डाक्टर्स को डेडबॉडी की भाषा समझ में आना चाहिए।
पिछले साल 2025 में उज्जैन के सरकारी पीएम रूम में जहाँ 3 हजार 27 डेडबॉडी का पोस्टमार्टम, मतलब शव विच्छेदन किया गया, वहीं पिछले 3 सालों में 5 हजार से ज्यादा शवों का पीएम किया गया। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के अनुसार पिछले 3 सालों में पोस्टमार्टम की संख्या लगभग 50 प्रतिशत बढ़ चुकी है, मगर पोस्टमार्टम रूम में न संसाधन बढ़े हैं ना ही फोरेंसिक विशेषज्ञ, शासन से मंजूर किए जा चुके खाली पदों में से कई पद आज तक खाली पड़े हैं। नतीजतन, डेडबॉडी की संख्या बढ़ जाने पर शव विच्छेदन में काफी परेशानी आती हैं। मतलब साफ है संसाधन और सुविधाओं के मामले में उज्जैन का स्वास्थ्य महकमा अभी भी पीछे है। उज्जैन के सरकारी अस्पतालों में पूर्व की अपेक्षा संसाधन व सुविधाएँ बढ़ी हैं लेकिन यहाँ के पोस्टमार्टम हाउस की बदहाली अभी भी दूर नहीं हो सकी हैं।
एक नजर आंकड़ों पर…
वर्ष पीएम संख्या
2023 1010
2024 1285
2025 3027