
उज्जैन। भैरवगढ़ जेल में बंद कैदियों के लिए जेल प्रशासन ने अनूठा प्रयास शुरू किया है। इसके तहत जेल में बंद कैदियों को उनके बच्चों से मिलने, बैठकर बातें करने और उन्हें छूने का मौका दिया जा रहा हैं। इससे कैदियों और उनके बच्चों में खुशी का माहौल हैं।
जेल अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि जेल में बंद ऐसे दंडित और विचाराधीन बंदी माता पिता जिनकी संतान की उम्र 3 से 10 वर्ष के बीच है। उनके बच्चों को हर महीने में एक बार स्पर्श मुलाकात कराई जा रही हैं। फरवरी 2026 से शुरू हुई इस अनूठी पहल का उद्देश्य बंदियों को अपने परिवार से भावनात्मक रूप से जोडऩा है ताकि वे अपराधों से दूर रहें। इसी कड़ी में हर माह के अंतिम शनिवार को बड़ी संख्या में बंदी के परिजन अपने छोटे बच्चों के साथ भैरवगढ़ जेल पहुंच रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जेल में वर्षों से बंद कई बंदी ऐसे भी थे जिन्होंने पिछले चार-पांच वर्षों से अपने बच्चों को देखा तक नहीं था। शासन की इस अनूठी पहले से जब उनके बच्चे सामने आए तो बच्चे खुशी से झूम उठे। वहीं, कैदियों की आंखें उन्हें देख छलक पड़ी। बंदी यह देखकर खुश हुए कि अब उन्हें हर महीने अपने बच्चों को गले लगाने का मौका मिलेगा। वहीं, बच्चे यह सोचकर खुशी से झूमते रहे कि उन्हें भी अपने माता-पिता से मिलने का अवसर मिलेगा।
इन दिशा निर्देशों का पालन जरूरी
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