
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण संपत्तियों को वैधानिक पहचान देने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए स्वामित्व योजना के तहत मिलने वाले संपत्ति अधिकार दस्तावेज पूरी तरह नि:शुल्क करने का रास्ता साफ कर दिया है। अब योजना के अंतर्गत संपत्तियों की रजिस्ट्री पर लगने वाले सेस और पंचायत उपकर दोनों से छूट दे दी गई है। वित्त विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इससे पात्र ग्रामीणों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उनकी संपत्तियों का वैधानिक स्वामित्व दस्तावेज मिल सकेगा।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना, भूमि विवादों को कम करना और संपत्ति मालिकों को बैंक ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोडऩा है। स्वामित्व योजना को 13 मार्च 2026 को राज्य मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी थी। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग ने पहले ही रजिस्ट्री पर लगने वाले पंचायत उपकर से छूट दे दी थी। अब वित्त विभाग ने भी रजिस्ट्री पर लगने वाले सेस को समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है। दोनों छूट लागू होने के बाद पात्र हितग्राहियों की संपत्तियों की पूरी तरह नि:शुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी।
46 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार के सर्वे के अनुसार प्रदेश में करीब 46 लाख ऐसे ग्रामीण हैं, जिनके पास अपनी आवासीय संपत्ति का कोई वैधानिक स्वामित्व दस्तावेज नहीं है। अब सरकार इन सभी पात्र लोगों की संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराएगी और उस पर लगने वाला स्टांप शुल्क भी स्वयं वहन करेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार के खजाने से करीब 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होने का अनुमान है।
तहसीलदार भी कर सकेंगे रजिस्ट्री
योजना को तेजी से लागू करने के लिए राज्य सरकार पहले ही तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को रजिस्ट्री करने के अधिकार दे चुकी है। इससे अब राजस्व अधिकारी सर्वे के बाद संबंधित नागरिकों के नाम संपत्ति का पंजीयन कर सकेंगे। इस व्यवस्था से पंजीयन कार्यालयों पर काम का दबाव कम होगा और पूरी प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से अधिक तेज़ी से पूरी की जा सकेगी।
ड्रोन सर्वे से तय होगी संपत्ति की सीमा
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे राज्यों के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इसके तहत गांवों की आबादी क्षेत्र का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण किया जाता है। प्रत्येक मकान और आवासीय भूखंड की सटीक सीमा निर्धारित की जाती है। सर्वे पूरा होने के बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। इनके निराकरण के बाद अंतिम नक्शा तैयार होता है और फिर संपत्ति मालिकों को रजिस्टर्ड स्वामित्व अधिकार अभिलेख जारी किए जाते हैं।
ग्रामीणों को होंगे कई फायदे
स्वामित्व योजना लागू होने से ग्रामीणों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। संपत्ति का वैधानिक रिकॉर्ड बनने से भूमि और स्वामित्व संबंधी विवादों में कमी आएगी। सभी ग्रामीण संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी। संपत्ति का कानूनी दस्तावेज मिलने के बाद ग्रामीण बैंक से ऋण लेने में सक्षम होंगे, क्योंकि वे अपनी संपत्ति को वैध दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर सकेंगे। वहीं, ग्राम पंचायतों को भी संपत्ति कर निर्धारण और गांवों के विकास की बेहतर योजना बनाने में सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी और गांवों में भूमि संबंधी विवादों को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होगी।
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