
कोलकाता: ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की हार के बाद लगातार झटके मिल रहे हैं. पहले टीएमसी के विधायकों ने अलग गुट बनाकर विधानसभा में अपना नेता प्रतिपक्ष रितब्रता बनर्जी को बनवा लिया और अब टीएमसी के सांसद भी बागी हो सकते हैं. इंडिया ब्लॉक की मीटिंग के बीच खबर है कि टीएमसी के 20 सांसदों ने सीक्रेट मीटिंग की है. इनके सांसदों के नाम भी सामने आ गए हैं.
टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों ने दिल्ली में एक गुप्त बैठक की. इनमें प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय और जगदीश बसुनिया समेत कई नेता शामिल हैं. इस बैठक में सांसदों ने आगे की रणनीति बनाई. टीएमसी सांसदों की योजना है कि वे या तो स्पीकर के दिल्ली लौटने पर सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा पत्र सौंपेंगे या 20 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ स्पीकर से मिलेंगे.
खबर लिखे जाने तक टीएमसी के राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इस्तीफा देने के बाद टीएमसी और ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. रॉय ने आरजी कर हत्याकांड और रेप की घटना पर कहा, ‘सत्ता का नशा टीएमसी के सिर पर इस कदर चढ़ गया था कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई उन्हें छू भी नहीं सकता.’
रॉय ने कहा, ‘बंगाल के इतिहास में पहली बार पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार सत्ता में आई है. मतदान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. पार्टी ने इस संबंध में कोई विश्लेषण नहीं किया. पिछले पंद्रह वर्षों में सत्ता में रहे मंत्री, पंचायत नेता, पार्षद, महापौर आदि पहुंच से बाहर हो गए. उनसे संपर्क करना भी मुश्किल हो गया था. वे जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुके थे. हमारे पार्टी कार्यकर्ता जिन्होंने अपने खून-पसीने से संगठन को मजबूत किया, वाम मोर्चे के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें दरकिनार कर दिया गया और बिचौलिए, चोर, डाकू और बलात्कारी सामने आ गए और करोड़ों की लूट की गई.’
इससे पहले टीएमसी के विधायकों का एक गुट अलग हो चुका है और उन्होंने बंगाल विधानसभा में अपना नेता प्रतिपक्ष रितब्रता बनर्जी को चुना है. बागी विधायकों ने ममता बनर्जी की ओर से चुने गए नेता विपक्ष को चुनौती देते हुए ये कदम उठाया है. इन 58 बागी विधायकों ने अपना समर्थन पत्र विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को सौंप दिया था, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया था. बंगाल में टीएमसी ने 294 सीटों में से 80 सीटें जीती थीं. ममता के पास अब 22 विधायकों का समर्थन है. यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता विपक्ष चुनने के प्रस्ताव पर फर्जी साइन का आरोप लगाने के बाद रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था.
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