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चाकू की नोक पर जबलपुर: चुनौती बने ‘यंग नाइफ गैंग’

June 08, 2026

  • बीते 5 महीने में शहर में 201 वारदातें, 15 हत्याएं, 44 मर्डर अटेम्प्ट
  • हर माह 40 से ज्यादा चाकूबाजी की घटनाएं, 90 प्रतिशत आरोपी कम उम्र के

जबलपुर। संस्कारधानी की पहचान अब चाकूबाजी की बढ़ती घटनाओं से धूमिल होती नजर आ रही है। छोटी-छोटी कहासुनी, सड़क पर हुए विवाद, नशे की हालत में हुए झगड़े और वर्चस्व की लड़ाई अब सीधे चाकू तक पहुंच रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि बीते पांच महीनों में शहर में 201 चाकूबाजी की घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 44 मामलों में हत्या का प्रयास किया गया।सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन वारदातों में शामिल 90 प्रतिशत आरोपी नई उम्र के युवक हैं, जो मामूली विवाद पर भी जानलेवा हमला करने से नहीं हिचक रहे।


  • पुलिस आंकड़ों और पड़ताल में सामने आया है कि जनवरी से मई 2026 के बीच शहर में चाकूबाजी की 201 घटनाएं दर्ज हुईं। यानी औसतन हर दिन एक से ज्यादा और हर महीने 40 से अधिक चाकूबाजी की वारदातें हुईं। इन घटनाओं में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 44 मामलों में पीडि़तों को मारने की नीयत से हमला किया गया। इसके अलावा चाकूबाजी से जुड़े 109 प्रकरण विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किए गए।

    15 घरों के बुझ गए चिराग
    इन पांच महीनों में हुई चाकूबाजी ने 15 परिवारों से उनके अपने छीन लिए। किसी ने बेटा खोया, किसी ने भाई और किसी ने घर का कमाने वाला सदस्य। परिजनों का दर्द एक जैसा है विवाद इतना बड़ा नहीं था कि किसी की जान ले ली जाए कई मामलों में पीडि़तों का बदमाशों से कोई पुराना विवाद तक नहीं था। सिर्फ कहासुनी हुई और चाकू निकल आया।

    नशा, वर्चस्व और गुस्सा बन रहा जानलेवा
    पुलिस द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया कि बड़ी संख्या में आरोपी घटना के समय नशे में थे। विशेषज्ञों का कहना है कि शराब और नशे के प्रभाव में युवक छोटी-सी बात पर अपना आपा खो बैठते हैं और जेब में रखा चाकू निकाल लेते हैं।चिंता की बात यह भी है कि सोशल मीडिया और गैंग संस्कृति के प्रभाव में कई युवक खुद को ‘दबंग’ साबित करने के लिए भी चाकूबाजी कर रहे हैं।

    जेल से छूटकर फिर उठा रहे चाकू
    पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि लगभग 20 प्रतिशत मामलों में आरोपी पहले भी जेल जा चुके थे।जेल से बाहर आने के बाद भी कई अपराधी दोबारा चाकूबाजी की घटनाओं में शामिल पाए गए। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर जेल अपराधियों को सुधार रही है या उन्हें और अधिक खतरनाक बना रही है?

    5 माह में 423 चाकू जब्त, फिर भी नहीं थम रहा आतंक
    पुलिस ने पिछले पांच महीनों में 423 से अधिक चाकू बरामद किए हैं।सबसे ज्यादा चाकू माढ़ोताल, अधारताल, गढ़ा, हनुमानताल और गोहलपुर थाना क्षेत्रों से पकड़े गए हैं।ऑनलाइन चाकू खरीदने वालों पर भी कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बावजूद अपराधियों के हाथों में हथियार पहुंच रहे हैं।

    कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा
    चाकूबाजी अब सिर्फ अपराध नहीं रही, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। जब छोटी-छोटी बातों पर चाकू निकलने लगे, तो आम नागरिकों का सुरक्षा भाव कमजोर होने लगता है।विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गिरफ्तारी और बरामदगी से समस्या का समाधान नहीं होगा। स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता, नशे पर नियंत्रण, गैंग संस्कृति पर रोक और अपराधियों की प्रभावी निगरानी जरूरी है।

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