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3 साल बाद पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का संयोग

June 09, 2026

अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर में लगेगी और 15 को सुबह 8.23 बजे तक रहेगी

इंदौर। 3 साल के अंतराल के बाद पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) में सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) का विशेष संयोग (Special coincidence) बन रहा है। 15 जून को उदया तिथि में सोमवती अमावस्या आस्था और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी।



  • सोमवती अमावस्या पर शहर से हजारों लोग मां नर्मदा और शिप्रा में डुबकी लगाने रवाना होंगे, वहीं शहर के मंदिरों, मठों और आश्रमों में अमावस्या के तहत् विशेष अनुष्ठान और तर्पण के आयोजन किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि सोमवार को आती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस साल 2026 की पहली सोमवती अमावस्या पुरुषोत्तम मास में पड़ रही है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामचन्द्र शर्मा वैदिक के अनुसार, सोमवती अमावस्या का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है। सोमवती अमावस्या का व्रत करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है, साथ ही पितरों की भी कृपा बरसती है।

    पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा
    सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करने का विधान है। परिक्रमा करते समय सूत का धागा लपेटा जाता है। पुरुषोत्तम मास होने के कारण पीपल में भगवान विष्णु का वास और अधिक फलदायी हो जाता है।

    पितरों के लिए तर्पण
    इस दिन पितरों के नाम से जल में तिल मिलाकर तर्पण करें और उनके निमित्त गीता का पाठ करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

    उदयातिथि में मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या
    वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 15 जून को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी। इस दिन सुबह का समय स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।

    इसलिए मानी जा रही है अमावस्या विशेष
    पुरुषोत्तम मास में पडऩे वाली सोमवती अमावस्या को बेहद दुर्लभ और पुण्यदायी संयोग माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह अवसर लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है, जब अधिक मास की अमावस्या सोमवार को पड़ती है। इस दिन पितरों के निमित्त तिल, जल और सफेद पुष्प अर्पित कर तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं ।

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