
इंदौर। प्रदेश में बसों का सफर आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है। डीजल समेत परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी का हवाला देते हुए बस संचालकों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। इस संबंध में गुरुवार को परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह और बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने की बात कही जा रही है। बैठक में किराया वृद्धि के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बताया कि वर्ष 2021 के बाद से बस किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान डीजल, टायर, स्पेयर पाट्र्स, बीमा और कर्मचारियों के वेतन पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। बस संचालकों के अनुसार पिछले एक महीने में ही डीजल करीब 10 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है, जिससे संचालन लागत में बड़ा इजाफा हुआ है।
एसोसिएशन ने सरकार के सामने वर्तमान किराया जो 1.25 रुपए प्रति किलोमीटर है को 60 प्रतिशत बढ़ाकर 2 रुपए करने की मांग की है। हालांकि संचालकों का कहना है कि लागत के हिसाब से यह वृद्धि भी पर्याप्त नहीं है। उनका दावा है कि बीते चार वर्षों में परिवहन लागत में करीब 50 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है, जबकि किराया जस का तस बना हुआ है। ऐसे में कई रूटों पर बस संचालन घाटे का सौदा बन गया है।
किराया नहीं बढ़ाया तो होगी हड़ताल
शर्मा ने बताया कि बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर बस संचालकों की पिछले हफ्ते परिवहन मंत्री के साथ बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने एक सप्ताह में किराया बोर्ड की बैठक करते हुए किराया संशोधन का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई बैठक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर के बस संचालक हड़ताल पर जा सकते हैं।
16 लाख यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ
प्रदेश में करीब 32 हजार बसें संचालित होती हैं और प्रतिदिन लगभग 16 लाख यात्री इनसे सफर करते हैं। ऐसे में किराया बढ़ोतरी को लेकर लिया जाने वाला कोई भी निर्णय लाखों यात्रियों की जेब पर सीधा असर डालेगा। अब परिवहन विभाग और बस संचालकों की गुरुवार को होने वाली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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