
नई दिल्ली. अमेरिका (US) और इजरायल (Israel) ने संयुक्त ऑपरेशन (Joint operation) के तौर पर ईरान (Iran) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की गुरुवार की घोषणा से हैरानी जताई. क्योंकि उन्हें इस बारे में अमेरिकी ने पहले कोई सूचना नहीं दी.
दरअसल, ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि ईरान के नेतृत्व ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे को मंजूरी दे दी है. इससे 60 दिन के संघर्ष-विराम, होर्मुज को फिर से खोलने और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत का रास्ता साफ हो सकता है. इन्हीं घटनाक्रमों के आधार पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के खिलाफ नियोजित अमेरिकी हमलों को रद्द कर दिया है.
अमेरिकी समाचार आउटलेट ‘एक्सियोस’ (Axios) की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि ट्रंप द्वारा प्रस्तावित समझौते का खुलासा करने से पहले नेतन्याहू को इसकी पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी. ट्रंप की घोषणा के बाद नेतन्याहू ने उनसे फोन पर बात की, जिसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया.
नेतन्याहू ने कहा कि भले ही इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है, लेकिन अंतिम समझौते में ईरान से संवर्धित सामग्री को हटाने, संवर्धन बुनियादी ढांचे को नष्ट करने, मिसाइल उत्पादन को सीमित करने और आतंकवादी प्रॉक्सी के लिए ईरान का समर्थन बंद करने की ट्रंप की प्रतिबद्धता सराहनीय है.
ट्रंप का ये बड़ा फैसला कतर की सक्रिय मध्यस्थता के बाद आया है. सूत्रों के अनुसार, कतर के अधिकारियों और ईरानी वार्ताकारों ने बुधवार देर रात तक काम करके ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने, होर्मुज को खोलने और भविष्य की परमाणु वार्ताओं के ढांचे जैसे मुख्य मुद्दों पर मतभेदों को कम किया. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने इस मसौदे को मंजूरी दे दी है और उन्हें कई खाड़ी देशों का भी समर्थन प्राप्त है.
दूसरी ओर ईरान ने ट्रंप के डील फाइनल वाले बयान को सिरे से खारिज कर दिया. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि डील का मुख्य हिस्सा लगभग तय था, लेकिन अमेरिका रुख बार-बार बदल रहा है और नई मांगें रख रहे हैं. हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस वीकेंड यूरोप में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसके भविष्य को लेकर अभी भी अनिश्चितता जताई है.
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