
40 से 45 हजार की जांच और इलाज अब सिर्फ 10 रु. में, प्रदेश के पहले सरकारी आईबीडी क्लिनिक से मरीजों को राहत
इंदौर। प्रदेश (State) के पहले सरकारी आईबीडी (इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज) क्लिनिक (Clinic) की शुरुआत के बाद मरीजों में तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (Super Speciality Hospital) में शुरू किए गए इस विशेष क्लिनिक में हर सप्ताह 10 से 15 नए मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें कई ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो लंबे समय से पेट दर्द, बार-बार दस्त और पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान थे, लेकिन बीमारी की सही पहचान नहीं हो पा रही थी।
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हाल ही में खोले गए आईबीडी क्लिनिक में मरीजों की संख्या बढऩे लगी है। हर हफ्ते लगभग 15 मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि आईबीडी के मरीजों में 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे अधिक देखी जा रही है। पहले इसे सामान्य पेट की समस्या समझकर नजरअंदाज किया जाता था, लेकिन समय पर जांच नहीं होने से बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। क्लिनिक शुरू होने के बाद दो गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू किया गया है।
बालों का झडऩा, लाल आंखें और डिप्रेशन के लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार आईबीडी और आईबीएस अलग-अलग बीमारियां हैं। दोनों में पेट दर्द और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन आईबीडी में आंतों में सूजन होती है। इसका असर केवल आंतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आंखों, त्वचा, बालो का झडऩा, जोड़ों और मानसिक स्वास्थ पर भी पड़ सकता है, जिसके चलते मरीज कई बार डिप्रेशन में चले जाते हैं। शुरुआती दौर में इसका इलाज संभव है, लेकिन ज्यादा पुरानी होने पर यह कैंसर का रूप भी ले लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईबीडी प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारी है और इसका उपचार नियमित दवा तथा चिकित्सकीय निगरानी से ही संभव है। समय पर जांच और सही उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
40 हजार की जांच 10 रुपए में
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शुरू किए गए इस क्लिनिक में निजी अस्पतालों में जिन जांचों और उपचार पर 40 से 45 हजार रुपए तक खर्च आता है, वही सुविधाएं यहां मात्र 10 रुपए की ओपीडी पर्ची पर दी जा रही हैं। मरीजों को आवश्यक दवाइयां भी नि:शुल्क दी जा रही हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
बचाव के लिए सुझाव
ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें।
जंक फूड और अधिक मीठे पेय पदार्थों से बचें।
नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें।
शराब व कैफीन का सेवन कम करें।
लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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