
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के भीतर जारी सियासी खींचतान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। पार्टी के बागी खेमे (Rebel Faction) की ओर से दावा किया गया है कि उनके समर्थन में आने वाले विधायकों (MLAs) की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब यह आंकड़ा 65 तक पहुंच सकता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों और कुछ महत्वपूर्ण बैठकों ने राजनीतिक हलकों (Political Circles) में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें पिछले कुछ समय से सामने आती रही हैं। पार्टी से निष्कासित किए गए नेताओं और बागी विधायकों के एक समूह ने संगठन के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए हैं। इसी क्रम में बागी खेमे का नेतृत्व कर रहे रिताब्रता बनर्जी लगातार यह दावा करते रहे हैं कि बड़ी संख्या में विधायक उनके संपर्क में हैं और आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
ताजा विवाद उस समय और गहरा गया जब कोलकाता में कुछ नेताओं के बीच हुई मुलाकातों की चर्चा सामने आई। राजनीतिक गलियारों में इन बैठकों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि विधानसभा परिसर और अन्य स्थानों पर हुई बातचीत के बाद बागी खेमे ने अपने समर्थन आधार में वृद्धि का दावा किया। हालांकि किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से इस संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
बागी गुट का कहना है कि उनके साथ जुड़ने वाले विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां यह संख्या 58 बताई जा रही थी, वहीं बाद में 64 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया। अब एक और विधायक के समर्थन की बात सामने आने के बाद यह आंकड़ा 65 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि संबंधित विधायक की पहचान को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है, जिसके चलते राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक किसी विधायक या सांसद द्वारा सार्वजनिक रूप से पक्ष बदलने की घोषणा नहीं की जाती, तब तक ऐसे दावों को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए। फिर भी लगातार सामने आ रही बैठकों और दावों ने बंगाल की राजनीति में उत्सुकता बढ़ा दी है।
राज्य की राजनीति में हाल के दिनों में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिले हैं। लोकसभा और राज्यसभा स्तर पर भी पार्टी से जुड़े नेताओं के रुख को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में विधानसभा के भीतर संभावित बदलावों की खबरों ने राजनीतिक वातावरण को और गर्म कर दिया है। विपक्षी दल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी दल के भीतर बड़े पैमाने पर असंतोष सामने आता है, तो उसका असर केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शासन और राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हर नए दावे और बैठक को गंभीरता से देखा जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बागी खेमे के दावों में कितनी वास्तविकता है और क्या आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आएगा। जब तक संबंधित नेताओं या पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक यह मामला राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं का विषय बना रहेगा।
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