
एवियन-लेस-बैंस। फ्रांस (France) के एवियन-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से भारत के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ महीनों से खाड़ी में ईरान युद्ध के कारण यूक्रेन का मुद्दा वैश्विक मंच पर थोड़ा पीछे छूट गया था, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और अन्य G7 नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध को वापस अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रख दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) को स्थिर रखने के लिए रूसी तेल पर दी गई छूट जल्द ही खत्म की जा सकती है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ते कच्चे तेल के आयात पर सीधा असर पड़ेगा।
ट्रंप का ‘गेम प्लान’: तेल की कीमतों और कूटनीति का संतुलन
जब वैश्विक तेल सप्लाई खतरे में थी, तब उन्होंने रूस को तेल बेचने की छूट दी ताकि अमेरिका और दुनिया में महंगाई न बढ़े। अब जब ईरान के साथ तनाव कम हो रहा है, वे रूस पर दोबारा कड़ा आर्थिक दबाव बनाने के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने एवियन में पत्रकारों से कहा कि खाड़ी में लगभग साढ़े तीन महीने से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के समझौते के बाद, अब ईरान का मुद्दा पीछे छूट जाएगा।
ईरान युद्ध के दौरान तेल की कीमतों को नीचे रखने के लिए रूसी तेल पर प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। ट्रंप का कहना है कि चूंकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल की आवाजाही फिर से सुचारू रूप से शुरू हो गई है, इसलिए प्रतिबंध दोबारा लागू करने का समय आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जल्द ही हम ऐसा कर पाएंगे, क्योंकि अब तेल की आवाजाही आसाना हो जाएगी। हम जल्द ही ऐसा करने की स्थिति में होंगे।”
G7 देशों के बीच रूस की ऊर्जा कमाई को रोकने के लिए दबाव बढ़ाने पर सहमति बन गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त तेल टैंकरों) और ऊर्जा राजस्व नेटवर्क पर नए प्रतिबंधों की घोषणा भी कर दी है।
भारत की टेंशन क्यों बढ़ रही है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद पिछले कई महीनों से रियायती रूसी तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। 28 फरवरी 2026 को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल को देखते हुए, अमेरिका ने मार्च में वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने के लिए भारत सहित कुछ देशों को रूसी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों से अस्थायी छूट दी थी।
17 जून की डेडलाइन
इस एक महीने की छूट को दो बार बढ़ाया जा चुका है और 17 जून 2026 (आज) यह मियाद समाप्त हो रही है। यदि अमेरिका इसे आगे नहीं बढ़ाता है, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस से सस्ता तेल मंगाना और उसका भुगतान करना भारी कूटनीतिक और वित्तीय जोखिम का काम हो जाएगा।
G7 सम्मेलन में आमंत्रित भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समुद्री व्यापार पर पड़े असर को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान हॉर्मुज के रास्ते होने वाले व्यापार में आए व्यवधान और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को प्रमुखता से उठाया।
यूक्रेन और G7 का नया रुख
यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की भी G7 बैठक में मौजूद रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस शांति के लिए गंभीर नहीं है और उसे बातचीत के लिए मजबूर करने का एकमात्र तरीका कड़े आर्थिक प्रतिबंध हैं। जेलेंस्की ने रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से यूक्रेन के पावर ग्रिड और शहरों को बचाने के लिए G7 नेताओं से और अधिक पैट्रियट मिसाइलों की मांग की, जिस पर सहयोगी देशों ने उनका समर्थन किया।
कुल मिलाकर अमेरिका और G7 का यह रुख भारत के लिए कूटनीतिक रूप से एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है। एक तरफ भारत को अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ते तेल की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के कड़े होते रुख और नए सिरे से लागू होने वाले प्रतिबंधों के बीच संतुलन साधना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। 17 जून की डेडलाइन के बाद अगर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग नए सिरे से कड़ाई करता है, तो वैश्विक तेल बाजार में फिर से हलचल मचने की पूरी संभावना है।
भारत का रूस से कच्चे तेल, अन्य ईंधन का आयात मई में बढ़कर 6.7 अरब डॉलर पर
भारत मई, 2026 में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा खरीद बढ़ाए जाने से रूस से कुल कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात बढ़कर अनुमानित 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मई में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत रही, जिसका मूल्य 4.8 अरब यूरो था। इसके अलावा तेल उत्पादों और कोयले का आयात क्रमश: 55 करोड़ यूरो और 42.9 करोड़ यूरो रहा। सीआरईए ने कहा कि मई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मासिक आधार पर आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका एक प्रमुख कारण रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी रहा।
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