वॉशिंगटन। भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन (Anil Menon) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए अपने लंबे अंतरिक्ष मिशन पर 14 जुलाई 2026 को रवाना होंगे। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) ने बताया कि यह मिशन कजाखस्तान स्थित बैकोनूर कोस्मोड्रोम (Baikonur Cosmodrome) से लॉन्च किया जाएगा।
अनिल मेनन अपने दल के साथ लगभग 240 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे और वसंत 2027 तक International Space Station पर वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों में भाग लेंगे। इस मिशन को भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मानव अभियानों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आईएसएस मिशन हमेशा बहुराष्ट्रीय सहयोग के तहत संचालित किए जाते हैं। इस अभियान में अनिल मेनन के साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री Pyotr Dubrov और Anna Kikina भी शामिल होंगे। तीनों अंतरिक्ष यात्री मिलकर अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं को अंजाम देंगे।
नासा के अनुसार, मिशन के दौरान प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में यह अध्ययन शामिल होगा कि अंतरिक्ष के वातावरण और शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में मानव शरीर किस प्रकार खुद को अनुकूलित करता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह शोध भविष्य में लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगा।
इसके अलावा अंतरिक्ष में रहने, काम करने और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर भी कई प्रयोग किए जाएंगे, जिनका लाभ आगामी चंद्र और मंगल मिशनों को मिल सकता है।
अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में हुआ था। उनके माता-पिता भारतीय और यूक्रेनी मूल के प्रवासी हैं। चिकित्सा और अंतरिक्ष विज्ञान दोनों क्षेत्रों में अनुभव रखने वाले मेनन को नासा के प्रमुख अंतरिक्ष यात्रियों में गिना जाता है।
240 दिनों तक चलने वाला यह मिशन न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए अहम होगा, बल्कि भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है।
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