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निसंतान मृतक का फर्जी बेटा बनकर हड़पी करोड़ों की जमीन

June 20, 2026

  • सरकारी रिकॉर्ड में की गई हेराफेरी का खुलासा, मुख्य आरोपी समेत परिवार के 6 लोगों पर एफआईआर

जबलपुर। जमीन की हेराफेरी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की पुश्तैनी भूमि हड़पने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि शातिर आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत पहले राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर एक निसंतान मृतक का फर्जी बेटा बनकर जमीन अपने नाम करा ली और बाद में उस भूमि को तीसरे पक्ष को बेच दिया। मामला तब उजागर हुआ जब जमीन का खरीदार कब्जा लेने पहुंचा और असली वारिसों को पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मझौली थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी राघवेंद्र उर्फ रघु राय समेत उसके परिवार के छह सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


  • पुलिस के अनुसार कटनी जिले के ग्राम अमरगढ़ निवासी चंद्रिका प्रसाद लोधी (55) ने शिकायत दर्ज कराई है कि मझौली स्थित खसरा नंबर 109 की करीब 8.253 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से राजस्व रिकॉर्ड में प्रेमलाल लोधी और सुकरत लोधी के नाम दर्ज थी। शिकायत में बताया गया है कि प्रेमलाल लोधी निसंतान थे और उनकी कोई संतान नहीं थी। इसी तथ्य का फायदा उठाते हुए मुख्य आरोपी राघवेंद्र उर्फ रघु राय ने कथित तौर पर राजस्व अमले से मिलीभगत कर खुद को प्रेमलाल लोधी का पुत्र दर्शाते हुए फर्जी फौती नामांतरण करा लिया। इसके बाद राजस्व अभिलेखों से मूल मालिकों का नाम हटवाकर अपने और अपने भाइयों के नाम दर्ज करा लिए गए।

    असली वारिसों को भनक तक नहीं लगी
    बताया गया है कि पूरी प्रक्रिया इतनी गोपनीय और सुनियोजित तरीके से की गई कि असली वारिसों और परिवार को इसकी जानकारी तक नहीं लग सकी। सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज होते ही आरोपियों ने विवादित भूमि को जय साहू नामक व्यक्ति को बेच दिया। जब खरीदार जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा, तब परिवार के सामने पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस और प्रशासन तक पहुंची।

    पुलिस जांच में सामने आया आरोपी का पुराना रिकॉर्ड
    जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि मुख्य आरोपी राघवेंद्र राय पहले से ही कथित जालसाजी के मामलों में संलिप्त रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसके खिलाफ पहले भी सिविल लाइन थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज हो चुका है। इतना ही नहीं, आरोपी पर जिला पंजीयक कार्यालय में कथित रूप से एक फर्जी किरायानामा प्रस्तुत करने का भी आरोप है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच अभी लंबित बताई जा रही है।

    राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों की होगी गहन जांच
    मामले में पुलिस अब यह जांच कर रही है कि नामांतरण प्रक्रिया के दौरान किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने, नामांतरण कराने और जमीन विक्रय की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढऩे पर और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला सिर्फ जमीन कब्जाने का नहीं बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में सुनियोजित हेराफेरी और संगठित धोखाधड़ी का बड़ा प्रकरण साबित हो सकता है।

    कई सवाल छोड़ गया मामला
    इस मामले ने राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा और नामांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक निसंतान व्यक्ति का फर्जी वारिस बनकर करोड़ों की जमीन का नामांतरण कैसे हो गया? और इतने बड़े बदलाव की जानकारी असली वारिसों तक क्यों नहीं पहुंची? इन सवालों के जवाब अब पुलिस और प्रशासनिक जांच से सामने आने की उम्मीद है।

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