img-fluid

देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक

June 21, 2026

नई दिल्ली। भारतीय साहित्य और सिनेमा(Indian literature and cinema) के इतिहास(history)में कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो समय की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस(permanent place) जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है ‘देवदास’(Devdas)। एक ऐसा किरदार, जिसके दर्द को दर्शकों ने अपना दर्द समझा, जिसकी अधूरी मोहब्बत ने लाखों दिलों को छुआ और जिसकी त्रासदी ने उसे अमर बना दिया।

देवदास का जन्म वर्ष 1901 में महान साहित्यकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कल्पना में हुआ था। कहा जाता है कि यह कहानी कहीं न कहीं उनके अपने जीवन के अनुभवों और भावनाओं से प्रेरित थी। लेकिन लेखक को इस किरदार को लेकर एक डर था। उन्हें लगता था कि उनका नायक आदर्शवादी नहीं है। वह प्रेम में असफल होता है, शराब का सहारा लेता है और अंततः दुखद मृत्यु को प्राप्त होता है। शायद इसी वजह से शरत चंद्र ने इस रचना को करीब 16 वर्षों तक प्रकाशित नहीं किया।

आखिरकार 1917 में जब ‘देवदास’ उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो उसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। लोगों को इस कहानी में अपना दर्द दिखाई देने लगा। देवदास की अधूरी प्रेम कहानी, पारो के प्रति उसका समर्पण और समाज की बंदिशों के आगे उसकी हार ने पाठकों को भावुक कर दिया।

साहित्य से निकलकर जब देवदास सिनेमा के पर्दे पर पहुंचा, तो उसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई। वर्ष 1928 में इस पर पहली मूक फिल्म बनी। इसके बाद 1936 में महान गायक-अभिनेता के.एल. सहगल ने देवदास को पर्दे पर जीवंत कर दिया। लेकिन 1955 में दिलीप कुमार ने जिस गहराई और संवेदनशीलता से इस किरदार को निभाया, उसने देवदास को भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया।

साल 2002 में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने इस क्लासिक कहानी को भव्य अंदाज में पेश किया। फिल्म में शाहरुख खान ने देवदास, ऐश्वर्या राय ने पारो और माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया। फिल्म के भावनात्मक दृश्यों और भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद 2009 में अनुराग कश्यप ने आधुनिक अंदाज में ‘देव डी’ बनाकर इस कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया।


  • आज तक ‘देवदास’ पर 14 से अधिक फिल्में और रूपांतरण बन चुके हैं। शायद यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है कि एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह किरदार लोगों के दिलों में जिंदा है। प्रेम, विरह, त्याग और आत्मसंघर्ष का यह प्रतीक भारतीय साहित्य और सिनेमा की सबसे अमर धरोहरों में गिना जाता है। देवदास सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है, जो हर उस इंसान को छूती है जिसने कभी प्रेम किया हो, खोया हो या दर्द को करीब से महसूस किया हो।

    Share:

  • BJP नेता नकवी ने राम मंदिर मामले को लेकर विपक्ष पर बोला हमला... कहा- ये लोग 'धर्म-विरोधी

    Sun Jun 21 , 2026
    रामपुर। भाजपा( BJP) नेता मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) ने राम मंदिर चढ़ावा घोटाले (Ram Mandir Donation scam) को लेकर विपक्ष पर हमला बोला है. उन्होंने राम मंदिर में दान के कथित दुरुपयोग पर विपक्षी दलों की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि “धर्म-विरोधी लोगों” को धार्मिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved