
नई दिल्ली । जमशेदपुर (Jamshedpur) के पटमदा थाना क्षेत्र स्थित बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी (Anti-Naxal) तलाशी अभियान (Search Operation) के दौरान पुलिस टीम को स्थानीय ग्रामीणों के विरोध (Protest) का सामना करना पड़ा। शनिवार सुबह गांव के कितापाठ जाहेरथान के पास सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस और सुरक्षा बलों (Security Forces )की टीम को घेर लिया और करीब पांच घंटे तक वहां से जाने नहीं दिया। बाद में स्थानीय जिला पार्षद की पहल पर बातचीत के जरिए मामला शांत हुआ और पुलिस टीम को वहां से निकलने दिया गया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस और सुरक्षा बलों की टीम शुक्रवार शाम दलमा रेंज के विभिन्न इलाकों में नक्सलियों की तलाश के लिए अभियान पर निकली थी। टीम का नेतृत्व पटमदा थाना प्रभारी विष्णु चरण भोगता कर रहे थे। अभियान में पुलिसकर्मियों के अलावा भुइयांसिनान कैंप से जुड़े कोबरा बटालियन के जवान भी शामिल थे।
तलाशी अभियान के दौरान टीम ने झुंझका, मेघादह, राजाबासा, अपो और सारी समेत कई इलाकों में जांच की। इसके बाद टीम बाटालुका गांव पहुंची। पुलिस का अभियान कथित तौर पर नक्सलियों और उनके संभावित मददगारों की तलाश पर केंद्रित था। इस दौरान गांव के कुछ घरों में भी तलाशी लिए जाने की जानकारी सामने आई।
बताया गया कि शनिवार सुबह करीब पांच बजे पुलिस की एलआरपी टीम बाटालुका निवासी लखन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों भारती सोरेन तथा सूमी सोरेन को साथ लेकर पैदल लौट रही थी। इसी दौरान लखन सोरेन की 10 वर्षीय बेटी पार्वती के रोने और शोर मचाने के बाद आसपास के लोग वहां पहुंचने लगे।
कुछ ही समय में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों के हाथों में लाठी और डंडे थे। उन्होंने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया और लखन सोरेन तथा उनकी दोनों पत्नियों को छोड़ने की मांग की। इसके अलावा ग्रामीणों ने बाटालुका निवासी युधिष्ठिर महतो को भी मुक्त करने की मांग रखी, जिसे बुधवार से पटमदा थाने में हिरासत में रखा गया था।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी होने तक पुलिस टीम को वहां से जाने नहीं दिया जाएगा। इसके बाद पुलिसकर्मी बारिश के बीच मौके पर ही मौजूद रहे और वरीय अधिकारियों के निर्देश का इंतजार करते रहे। इस दौरान करीब पांच घंटे तक पुलिस टीम और ग्रामीण आमने सामने रहे।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य करने का प्रयास शुरू किया गया। तनाव बढ़ने से रोकने के लिए अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद ली गई। सुबह करीब नौ बजे स्थानीय जिला पार्षद प्रदीप बेसरा की पहल पर युधिष्ठिर महतो को पटमदा थाना से घटनास्थल पर लाया गया।
इसके बाद ग्रामीणों की मांगों को लेकर बातचीत हुई और संबंधित लोगों को छोड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस टीम को वहां से जाने दिया। करीब पांच घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद स्थिति सामान्य हो सकी। किसी बड़े टकराव की सूचना सामने नहीं आई।
बाटालुका गांव दलमा की तराई से जुड़े उन इलाकों में स्थित है, जहां लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियान चलाए जाते रहे हैं। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण जंगलों के रास्ते आवाजाही संभव होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां यहां लगातार सतर्क रहती हैं।
नक्सल विरोधी अभियान के दौरान ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच इस तरह का विरोध स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति पैदा कर सकता है। फिलहाल पुलिस अभियान और ग्रामीणों के विरोध से जुड़े पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।
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