
इंदौर, वीरेंद्रसिंह सिसौैदिया। चार माह की दुधमुंही बच्ची की कितनी बदकिस्मती रही कि उसे इतनी छोटी उम्र में जेल जाना पड़ा। उसने कोई जुर्म नहीं किया था। पिता के कृत्य में उसकी मां को भी शामिल होना पड़ा और मां जब जेल गई तो पुलिस ने उसकी कस्टडी मां को सौंपी। उसके तीन भाई-बहन बड़े होने के कारण उनकी कस्टडी दादा के परिवार को सौंपी गई है।
दरअसल बड़गोंदा इलाका स्थित गवली पलासिया में तलाई में मिट्टी में गड़ी एक लाश मिली थी, जिसकी पहचान मिथुन उर्फ धर्मेंद्र भील के रूप में हुई थी। जांच में साफ हुआ कि मिथुन की हत्या कर उसकी लाश को यहां ठिकाने लगाने के लिए गाड़ दिया गया था। बड़गोंदा पुलिस ने हत्या के मामले में 30 साल के एक मजदूर को पकड़ा। उसने स्वीकार किया था कि मिथुन को वह बच्चे का इलाज कराने घर लाया था।
जब वह शख्स शौच करने चला गया तो मिथुन ने उस शख्स की पत्नी के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। पत्नी ने शोर मचाया तो पति घर आ गया और उसने मिथुन पर हमला कर उसे मार दिया। फिर पति-पत्नी ने मिलकर लाश को ठिकाने लगाया, जिसके चलते पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। दंपति के चार बच्चे हैं, जिनमें करीब 4 माह की दुधमुंही बच्ची भी है। जब दंपति को जेल पहुंचाया गया तो अन्य बच्चों को तो पुलिस ने दंपति के परिवार को सौंपा, लेकिन दुधमुंही बच्ची को मां के साथ रखते हुए जेल पहुंचाया। बच्ची को मां के साथ जेल भेजते समय हर पुलिसकर्मी भावुक था, लेकिन गंभीर अपराध में पति का साथ देने के चलते महिला को गिरफ्तार कर जेल पहुंचाना पड़ा।
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